बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी ने हाल ही में भारतीय फिल्म उद्योग और शिक्षा प्रणाली में इतिहास के चित्रण को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उनकी फिल्म ‘केसरी वीर: लीजेंड्स ऑफ सोमनाथ’ (Kesari Veer: Legends of Somnath) की रिलीज के संदर्भ में दिए गए इस बयान ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है।
सुनील शेट्टी का मुख्य तर्क
सुनील शेट्टी ने इस बात पर गहरा अफसोस जताया कि बॉलीवुड और हमारे स्कूलों के पाठ्यक्रम में विदेशी आक्रमणकारियों को भारतीय नायकों की तुलना में अधिक महत्व दिया गया है। उनके बयान के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- शेट्टी ने सवाल उठाया कि आखिर क्यों हमारी बातचीत और फिल्मों में अक्सर अकबर, बाबर, औरंगजेब और बीरबल जैसे नामों का ही जिक्र होता है? उन्होंने कहा कि हमें इन आक्रमणकारियों के बजाय अपने देश के असली नायकों की कहानियों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
- उन्होंने जोर देकर कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज और राजपूत राजाओं जैसे महान योद्धाओं के बारे में उतनी बात नहीं की जाती, जितनी की जानी चाहिए। उनका मानना है कि हर राज्य के अपने नायक हैं जिनकी वीरता की कहानियाँ अभी तक अनकही हैं।
- सुनील शेट्टी के अनुसार, “हमारा इतिहास हमारी संस्कृति के बारे में होना चाहिए। इसमें वेदों, राजपूतों और शिवाजी महाराज का जिक्र प्रमुखता से होना चाहिए।”
‘केसरी वीर’ और सोमनाथ मंदिर का इतिहास
सुनील शेट्टी की फिल्म ‘केसरी वीर’ गुजरात के सोमनाथ मंदिर के इतिहास और उसकी रक्षा करने वाले वीर योद्धाओं पर आधारित है।
- उन्होंने बताया कि फिल्म के लिए उन्होंने सोमनाथ मंदिर के इतिहास पर काफी शोध किया।
- शेट्टी इस बात से काफी भावुक दिखे कि सोमनाथ मंदिर को कई बार लूटा और नष्ट किया गया, लेकिन वह आज भी अडिग खड़ा है। यह फिल्म उन अनसुने नायकों को समर्पित है जिन्होंने मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
निष्कर्ष और बदलाव की मांग
सुनील शेट्टी ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम अपनी जड़ों की ओर लौटें और युवा पीढ़ी को अपने वास्तविक नायकों से परिचित कराएं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले कुछ वर्षों में ऐतिहासिक फिल्मों के प्रति दर्शकों का नजरिया बदला है और लोग अब अपनी संस्कृति से जुड़ी कहानियों को देखना पसंद कर रहे हैं।


