31 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐतिहासिक अध्याय तब जुड़ा जब सुनेत्रा पवार ने राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। अपने पति और दिग्गज नेता अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद, उन्होंने न केवल उनके परिवार की बल्कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और ‘दादा’ की राजनीतिक विरासत की कमान भी संभाल ली है।
कौन हैं सुनेत्रा पवार?
सुनेत्रा पवार का जन्म 1963 में धाराशिव (तत्कालीन उस्मानाबाद) के एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार में हुआ था। वह पूर्व कैबिनेट मंत्री और सांसद पद्मसिंह पाटिल की बहन हैं। 1985 में अजित पवार से विवाह के बाद वह पवार परिवार की बहू बनीं।
राजनीतिक बैकग्राउंड होने के बावजूद, वह दशकों तक सक्रिय राजनीति से दूर रहीं और अपना ध्यान सामाजिक कार्यों और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर केंद्रित रखा।
सामाजिक कार्यों से बनाई पहचान
सुनेत्रा पवार ने बारामती में जमीनी स्तर पर काम करके अपनी एक अलग पहचान बनाई है:
- इको विलेज का निर्माण: उन्होंने बारामती के काटेवाड़ी गांव को महाराष्ट्र का पहला ‘इको विलेज’ बनाने में मुख्य भूमिका निभाई, जहां जैविक खेती और सौर ऊर्जा पर जोर दिया गया।
- महिला सशक्तिकरण: ‘बारामती हाई-टेक टेक्सटाइल पार्क’ की चेयरपर्सन के रूप में उन्होंने हजारों महिलाओं को रोजगार मुहैया कराया।
- पर्यावरण संरक्षण: 2010 में उन्होंने ‘एनवायरमेंटल फोरम ऑफ इंडिया’ (EFOI) की स्थापना की, जो पर्यावरण जागरूकता के लिए काम करता है।
- शिक्षा: वह विद्या प्रतिष्ठान जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों की ट्रस्टी के रूप में हजारों छात्रों के भविष्य को संवारने में सक्रिय रही हैं।
राजनीति में प्रवेश और नया सफर
सुनेत्रा पवार का सक्रिय राजनीतिक सफर बहुत छोटा लेकिन उतार-चढ़ाव भरा रहा है:
- लोकसभा चुनाव 2024: उन्होंने अपनी ननद सुप्रिया सुले के खिलाफ बारामती से चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें वहां हार का सामना करना पड़ा।
- राज्यसभा सदस्य: हार के बावजूद पार्टी ने उन पर भरोसा जताया और जून 2024 में वह निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुनी गईं।
- उपमुख्यमंत्री का पद (2026): 28 जनवरी 2026 को एक विमान दुर्घटना में अजित पवार के निधन के बाद उपजे संकट ने उन्हें मुख्यधारा की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया। 31 जनवरी को उन्हें सर्वसम्मति से NCP विधायक दल का नेता चुना गया और उन्होंने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली।


