देशभर में परीक्षाओं के पेपर लीक मामले को लेकर जारी आंदोलन अब और अधिक उग्र रूप ले चुका है। दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर देश की संसद तक इस मुद्दे की गूंज सुनाई दे रही है। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में छात्रों और विभिन्न संगठनों का विरोध प्रदर्शन देर रात हिंसक टकराव में बदल गया, जिससे राजधानी में स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई।
देर रात टकराव और पथराव
जंतर-मंतर पर डटे प्रदर्शनकारियों को हटाने और स्थिति को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई। देर रात हुए इस टकराव में पथराव की घटनाएं भी सामने आईं। इस हिंसा में कई प्रदर्शनकारी छात्र और पुलिसकर्मी गंभीर रूप से चोटिल हो गए।
पुलिस का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच कुछ असामाजिक तत्व घुस आए, जिन्होंने माहौल खराब करने और पथराव शुरू करने का काम किया। पुलिस ने अब तक इस मामले में करीब 10 प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली हैं और माहौल बिगाड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
संसद भवन में गूंजा मुद्दा, विपक्ष आक्रामक
सड़क पर उतरी इस आंच का असर सीधे देश की सर्वोच्च पंचायत यानी संसद के भीतर देखने को मिला। विपक्षी दलों—विशेषकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी—ने नीट और अन्य भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक को लेकर संसद में जोरदार हंगामा किया।
- इस्तीफे की मांग: विपक्ष ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और संसद में प्रधानमंत्री के बयान की पुरजोर मांग की।
- संसद परिसर में प्रदर्शन: कांग्रेस और अन्य विपक्षी सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे और छात्रों के समर्थन में नारेबाजी की।
- पुलिस बर्बरता पर सवाल: सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेताओं ने छात्रों एवं नेताओं पर हुए पुलिस लाठीचार्ज और कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई।
राजनीतिक खींचतान और वार्ता के प्रयास
एक तरफ जहां विपक्षी दल सड़कों पर छात्रों के साथ खड़े दिख रहे हैं, वहीं सरकार भी इस मुद्दे को सुलझाने के लिए लगातार रणनीति बना रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा सहित कई शीर्ष नेताओं की बैठकें आयोजित की गई हैं।
सरकार का रुख है कि वह छात्रों की समस्याओं पर संसद में हर तरह की चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि सरकार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है।
जंतर-मंतर पर देर रात प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखा टकराव और पथराव। पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं से देश के लाखों युवाओं का भविष्य और उनका भरोसा दांव पर लगा है। जब तक सरकार और छात्रों के बीच किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बनती, तब तक यह संग्राम थमने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।


