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    कैसे बना होर्मुज स्ट्रेट : दुनिया की सबसे व्यस्त समुद्री सड़क, करोड़ों साल पुरानी है कहानी

    आज जब खाड़ी देशों में युद्ध की आहट होती है, तो पूरी दुनिया की नजरें होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर टिक जाती हैं। इसे दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘चोक पॉइंट’ माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह रणनीतिक गलियारा तब बना था जब धरती पर इंसानों का नामोनिशान भी नहीं था? वैज्ञानिकों के अनुसार, इसके बनने की कहानी करोड़ों साल पुरानी भूगर्भीय हलचलों से जुड़ी है।


    कैसे बना होर्मुज स्ट्रेट?

    होर्मुज जलडमरूमध्य का निर्माण कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि यह पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों के टकराने का परिणाम है। लगभग 20 से 30 मिलियन (2-3 करोड़) वर्ष पहले, अरब प्लेट (Arabian Plate) उत्तर की ओर खिसकते हुए यूरेशियन प्लेट (Eurasian Plate) से टकराने लगी। इस भारी दबाव के कारण ज़ाग्रोस पर्वत (Zagros Mountains) का निर्माण हुआ, जो आज ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित हैं। जैसे-जैसे प्लेटें खिसकीं, फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच की जमीन धंस गई। लगभग 15,000 से 20,000 साल पहले (अंतिम हिमयुग के अंत में), समुद्र का स्तर बढ़ने से यह हिस्सा पानी से भर गया और एक संकरा रास्ता बन गया, जिसे आज हम होर्मुज जलडमरूमध्य कहते हैं।


    भौगोलिक स्थिति: जहाँ समुद्र ‘प्यास’ बुझाता है

    यह जलडमरूमध्य उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान व संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच स्थित है। इसकी सबसे संकरी जगह मात्र 33 किलोमीटर चौड़ी है। यह काफी उथला है, जिससे बड़े जहाजों को निकलने के लिए बहुत सावधानी बरतनी पड़ती है।


    दुनिया पर राज करने वाला गलियारा: आर्थिक महत्व

    होर्मुज को “दुनिया की लाइफलाइन” कहा जाता है और इसके पीछे ठोस कारण हैं। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20-30% इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई जैसे देशों का तेल यहीं से होकर एशिया, यूरोप और अमेरिका जाता है। कतर, जो दुनिया का सबसे बड़ा लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) निर्यातक है, अपना लगभग पूरा स्टॉक इसी गलियारे के जरिए भेजता है। अगर यह रास्ता एक दिन के लिए भी बंद हो जाए, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिससे पूरी दुनिया में महंगाई का संकट पैदा हो सकता है।


    सामरिक और राजनीतिक तनाव

    अपनी अहमियत के कारण यह क्षेत्र हमेशा विवादों के केंद्र में रहता है। चूंकि इस स्ट्रेट का उत्तरी हिस्सा ईरान के नियंत्रण में है, इसलिए वह अक्सर पश्चिमी देशों के साथ तनाव होने पर इसे बंद करने की धमकी देता है। संकरा रास्ता होने के कारण यहाँ जहाजों पर हमले या उनके अपहरण का खतरा बना रहता है, जिसके लिए अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय नौसेनाएं यहाँ गश्त लगाती हैं।


    प्रकृति ने लाखों साल पहले जिस संकरे रास्ते को पहाड़ों के टकराने से बनाया था, वह आज आधुनिक दुनिया की सबसे बड़ी कमजोरी और ताकत बन चुका है। होर्मुज स्ट्रेट केवल एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति और राजनीति का वह केंद्र है जिसके बिना दुनिया की रफ्तार थम सकती है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और भारत के बीच का संबंध केवल भूगोल का नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) का है। भारत अपनी अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए जिस ईंधन का उपयोग करता है, उसका एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर आता है।


    भारत अपनी कच्चे तेल (Crude Oil) की कुल जरूरत का लगभग 80-85% आयात करता है।

    • इराक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारत के शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता हैं। इन सभी देशों से आने वाले टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर ही गुजरना पड़ता है।
    • भारत के कुल तेल आयात का लगभग 60% और एलएनजी (LNG) आयात का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। अगर यह रास्ता बंद होता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें रातों-रात आसमान छू सकती हैं।

    रणनीतिक चुनौतियां और ‘चोक पॉइंट’ का खतरा

    चूंकि यह जलमार्ग केवल 33 किलोमीटर चौड़ा है, इसलिए किसी भी युद्ध या तनाव की स्थिति में इसे ब्लॉक करना आसान है। ईरान अक्सर अमेरिका या पश्चिमी देशों के साथ तनाव होने पर इस रास्ते को बंद करने की धमकी देता है। भारत के ईरान के साथ अच्छे संबंध हैं, लेकिन वैश्विक संघर्ष की स्थिति में भारत की ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का डर हमेशा बना रहता है। इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से जहाजों का ‘वॉर रिस्क इंश्योरेंस’ (War Risk Insurance) बढ़ जाता है, जिससे आयात महंगा हो जाता है और अंततः इसका बोझ भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है।


    भारत की प्रतिक्रिया: ‘ऑपरेशन संकल्प’ (Operation Sankalp)

    खाड़ी क्षेत्र में टैंकरों पर होने वाले हमलों और सुरक्षा खतरों को देखते हुए, भारतीय नौसेना ने ‘ऑपरेशन संकल्प’ शुरू किया था। इसके तहत भारतीय युद्धपोत (Warships) होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास गश्त लगाते हैं ताकि भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिल सके। यह भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति और अपने आर्थिक हितों की रक्षा करने की क्षमता को दर्शाता है।


    विकल्प की तलाश: रणनीतिक तेल भंडार (SPR)

    होर्मुज जैसे संवेदनशील रास्तों पर निर्भरता के जोखिम को कम करने के लिए भारत ने Strategic Petroleum Reserves (SPR) बनाए हैं। भारत ने विशाखापत्तनम, मंगलौर और पादुर में विशाल भूमिगत गुफाओं में लाखों टन कच्चा तेल जमा कर रखा है। यह भंडार किसी भी आपात स्थिति (जैसे होर्मुज का बंद होना) में भारत को लगभग 9 से 12 दिनों तक बैकअप दे सकता है।


    चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) का महत्व

    भारत ईरान में चाबहार बंदरगाह विकसित कर रहा है। यह बंदरगाह होर्मुज जलडमरूमध्य के बिल्कुल मुहाने पर (ओमान की खाड़ी में) स्थित है। यह भारत को पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँच प्रदान करता है। साथ ही, यह होर्मुज के आसपास भारत की निगरानी क्षमता को भी मजबूत करता है।

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