पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भारी तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत और राहत की खबर सामने आई है। ईरान ने रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को भारत सहित अपने ‘मित्र देशों’ के लिए फिर से खोल दिया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार को घोषणा की कि भारत, चीन, रूस, इराक जैसे मित्र देशों के जहाजों को अब इस मार्ग से निर्बाध आवाजाही की अनुमति होगी।
एक तरफ ईरान ने भारत के लिए अपने रास्ते खोल दिए हैं, वहीं पाकिस्तान के जहाज ‘सेलेन’ (SELEN) को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से वापस खदेड़ दिया गया है। ‘सेलेन’ (SELEN), जो सेंट किट्स एंड नेविस के झंडे तले चल रहा था। यह जहाज संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शारजाह से रवाना हुआ था और पाकिस्तान के कराची बंदरगाह जा रहा था। 24-25 मार्च 2026 की रात, जैसे ही यह जहाज होर्मुज के मुहाने पर पहुँचा, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने इसे रोक दिया और वापस लौटने पर मजबूर कर दिया।
ईरान ने क्यों रोका?
ईरान के नेवल कमांडर अलिरेजा तंगसीरी के अनुसार, इस जहाज को दो मुख्य कारणों से रोका गया:
- कानूनी प्रोटोकॉल का उल्लंघन: जहाज ने ईरान द्वारा तय किए गए नए समुद्री नियमों का पालन नहीं किया था।
- अनुमति की कमी: ईरान ने अब होर्मुज से गुजरने के लिए ‘पूर्व अनुमति’ (Prior Permission) अनिवार्य कर दी है, जो इस जहाज के पास नहीं थी।
पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका
यह घटना पाकिस्तान के लिए एक बड़ी कूटनीतिक हार मानी जा रही है क्योंकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए ‘मध्यस्थ’ (Mediator) बनने की कोशिश कर रहे थे। ईरान के इस कदम ने साफ कर दिया है कि वह फिलहाल पाकिस्तान की इन कोशिशों को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहा है।
भारत को जहाँ “मित्र देश” बताकर बिना रोक-टोक आने-जाने की अनुमति दी गई है, वहीं पाकिस्तान के साथ इस तरह का बर्ताव दोनों देशों के साथ ईरान के बदलते समीकरणों को दर्शाता है।
शारजाह के पास लंगर डाले हुए है
AIS ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, ‘सेलेन’ अब पाकिस्तान जाने के बजाय वापस खाड़ी (Gulf) की ओर मुड़ गया है और फिलहाल शारजाह के पास लंगर डाले हुए है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि अब होर्मुज से केवल वही जहाज गुजर सकेंगे जो ईरान के साथ ‘पूर्ण समन्वय’ (Full Coordination) करेंगे।
ऊर्जा संकट पर लगाम लगने की उम्मीद
- ऊर्जा सुरक्षा: भारत अपनी जरूरत का लगभग 40-50% कच्चा तेल और 90% से अधिक एलएनजी (LNG) इसी मार्ग से आयात करता है। इसके खुलने से देश में गहराते ऊर्जा संकट और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी पर लगाम लगने की उम्मीद है।
- UN की अपील का असर: यह फैसला संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की उस अपील के बाद आया है, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी थी कि होर्मुज के बंद होने से वैश्विक स्तर पर तेल, गैस और उर्वरक की आपूर्ति ठप हो रही है।
- सुरक्षित गलियारा: ईरानी मिशन के अनुसार, ‘गैर-दुश्मन’ जहाज जो ईरान के खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं हैं, वे समन्वय (Coordination) के साथ सुरक्षित रूप से गुजर सकेंगे। हालांकि, अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों पर प्रतिबंध जारी रहने की संभावना है।
भारत पर प्रभाव
पिछले कुछ हफ्तों से होर्मुज में फंसे लगभग 22 भारतीय जहाजों और उनमें सवार 700 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी का रास्ता साफ हो गया है। भारत की संतुलित विदेश नीति और ईरान के साथ मजबूत द्विपक्षीय संबंधों के कारण ही युद्ध जैसी स्थितियों के बावजूद भारत को यह विशेष रियायत मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल भारत की ‘एनर्जी सप्लाई चेन’ सुधरेगी, बल्कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों में भी स्थिरता आएगी।


