होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, जापान और ऑस्ट्रेलिया सहित 22 देशों के नेताओं ने एक कड़ा संयुक्त बयान जारी किया है। इस बयान में ईरान की सैन्य गतिविधियों और वैश्विक व्यापार मार्ग में पैदा की जा रही बाधाओं की तीखी आलोचना की गई है।
ईरान की कार्रवाई की कड़ी निंदा
विभिन्न देशों के साझा बयान में खाड़ी क्षेत्र में बिना हथियार वाले कमर्शियल जहाजों पर ईरान द्वारा किए गए हालिया हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की गई है। नेताओं ने तेल और गैस संयंत्रों सहित नागरिक बुनियादी ढांचे पर हो रहे हमलों पर गहरी चिंता जताई है। ईरानी सेना द्वारा ‘असल में’ (de facto) होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद किए जाने को अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया गया है।
अंतरराष्ट्रीय कानून और UN प्रस्ताव का हवाला
नेताओं ने ईरान से अपील की है कि वह बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए अपनी आक्रामक गतिविधियों को तुरंत बंद करे।
- हस्तक्षेप पर रोक: बयान में ईरान से समुद्री माइंस बिछाने, ड्रोन और मिसाइल हमले करने और शिपिंग मार्ग को रोकने की कोशिशों को खत्म करने को कहा गया है।
- UNSC रेज़ोल्यूशन 2817: सभी देशों ने ईरान से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का पालन करने का आग्रह किया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
नेताओं ने जोर देकर कहा कि नेविगेशन की स्वतंत्रता अंतरराष्ट्रीय कानून का एक मौलिक सिद्धांत है। ईरान की इन कार्रवाइयों का असर पूरी दुनिया के लोगों पर पड़ेगा, विशेष रूप से सबसे कमजोर वर्गों पर, क्योंकि इससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन बाधित हो रही है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार जारी करने और उत्पादन बढ़ाने जैसे कदमों पर भी विचार किया जा रहा है।


