फरवरी 2026 की शुरुआत के साथ ही उत्तर भारत के मौसम में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। पहाड़ों पर लगातार हो रही बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश व शीतलहर ने ठंड का असर फिर से बढ़ा दिया है। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की सक्रियता के कारण मौसम विभाग ने आगामी कुछ दिनों तक इसी तरह की स्थिति बने रहने की संभावना जताई है।
दिल्ली-एनसीआर में कोहरे का कहर
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। सुबह के समय दिल्ली-एनसीआर में घना कोहरा छाया रह सकता है, जिससे दृश्यता (visibility) काफी कम होने की आशंका है। इसका सीधा असर सड़क यातायात, रेल सेवाओं और हवाई उड़ानों पर पड़ सकता है। प्रशासन ने वाहन चालकों को सावधानी बरतने और फॉग लाइट का उपयोग करने की सलाह दी है।
पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानों में बारिश
हिमालयी क्षेत्रों में, विशेष रूप से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी का दौर जारी है। गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे ऊंचे इलाकों में ताजी बर्फबारी हुई है, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, श्रीनगर, गुलमर्ग और पहलगाम में भी पारा शून्य से नीचे चला गया है।
मैदानी राज्यों की बात करें तो पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। कुछ स्थानों पर बिजली गिरने (वज्रपात) की भी चेतावनी दी गई है।
आगामी अनुमान
मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के अलावा, 5 फरवरी की रात से एक और नया पश्चिमी विक्षोभ हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है। इसके प्रभाव से अगले सात दिनों के दौरान उत्तर भारत में मौसम अस्थिर बना रहेगा। उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में ‘घने से बहुत घने’ कोहरे की स्थिति बनी रह सकती है, जबकि मध्य प्रदेश और बिहार में भी शीतलहर का असर देखने को मिलेगा।
मौसम के इस बदलते मिजाज ने किसानों और आम जनजीवन को प्रभावित किया है, हालांकि पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटकों के लिए यह बर्फबारी उत्साह का विषय बनी हुई है।


