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    एसआईआर का दिखा बड़ा असर, इन राज्यों में घट गए 1.70 करोड़ वोटर

    भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा नौ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दूसरे चरण के परिणाम सामने आ गए हैं। इस प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से लगभग 1.70 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, जो कि इन क्षेत्रों के कुल मतदाताओं का लगभग 7.9% है।

    ​यह कवायद मुख्य रूप से आगामी विधानसभा चुनावों और मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाने के उद्देश्य से की गई थी।

    ​मुख्य आंकड़े और प्रमुख राज्य

    ​चुनाव आयोग के अनुसार, इस अभियान से पहले इन 9 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 21.4 करोड़ मतदाता थे, जो अब घटकर 19.7 करोड़ रह गए हैं।

    राज्य/केंद्रशासित प्रदेशमतदाता संख्या में गिरावट (प्रतिशत में)प्रमुख कारण
    गुजरात13.4% (सबसे अधिक गिरावट)पलायन, मृत्यु, दोहरी प्रविष्टि
    छत्तीसगढ़11.8%मतदाता सूची का शुद्धिकरण
    गोवा10.7%आवासीय परिवर्तन
    अंडमान और निकोबार16.9%तकनीकी और भौतिक सत्यापन
    केरल3.2%सामान्य संशोधन

    ​मध्य प्रदेश में भी मतदाता संख्या में बड़ी गिरावट

    ​मध्य प्रदेश में एसआईआर के बाद मतदाताओं की संख्या में 5.96% की कमी आई है।

    • हटाए गए नाम: राज्य की मतदाता सूची से लगभग 34.25 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
    • कुल मतदाता: पुनरीक्षण से पहले प्रदेश में 5.74 करोड़ मतदाता थे, जो अब घटकर लगभग 5.39 करोड़ रह गए हैं।
    • अंतिम प्रकाशन: मध्य प्रदेश के लिए संशोधित अंतिम मतदाता सूची 21 फरवरी, 2026 को प्रकाशित की गई है।

    SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है?

    ​एसआईआर एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करते हैं। यह सामान्य संशोधन से कहीं अधिक विस्तृत होता है।

    • मृत मतदाताओं को हटाना: उन लोगों के नाम हटाना जिनकी मृत्यु हो चुकी है लेकिन सूची में बने हुए थे।
    • पलायन (Migration): जो लोग स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर बस गए हैं, उनके नाम वर्तमान सूची से काटना।
    • फर्जी या डुप्लीकेट प्रविष्टियां: एक ही व्यक्ति के कई स्थानों पर बने वोटर आईडी कार्ड को समाप्त करना।
    • विदेशी नागरिक: सूची में किसी भी अयोग्य या विदेशी नागरिक के नाम की पहचान कर उसे हटाना।

    ​राजनीतिक प्रतिक्रिया और विवाद

    ​विपक्षी दलों ने इस भारी कटौती पर चिंता व्यक्त की है। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में, जहां नाम काटने की प्रक्रिया अभी भी चर्चा में है, वहां राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया है कि कई पात्र मतदाताओं के नाम भी बिना उचित नोटिस के काट दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी इस संबंध में याचिकाएं दायर की गई हैं, विशेषकर तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के संदर्भ में।

    ​अगला चरण

    ​चुनाव आयोग अब तीसरे चरण की तैयारी कर रहा है, जो अप्रैल 2026 से शुरू होने की उम्मीद है। इसमें दिल्ली, महाराष्ट्र और कर्नाटक सहित 22 अन्य राज्य और केंद्रशासित प्रदेश शामिल होंगे।

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