ढाका (बांग्लादेश) में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक के बीच हुई एक संक्षिप्त मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियां बटोर ली हैं। दोनों नेता बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होने ढाका पहुंचे थे। यह मुलाकात इसलिए अहम है क्योंकि मई 2025 में हुए भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष (पहलगाम हमले के बाद) के बाद दोनों देशों के बीच यह पहला उच्च स्तरीय संपर्क है।
पाकिस्तान का ‘शांति’ का दावा और प्रोपेगेंडा
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली सचिवालय ने इस सामान्य शिष्टाचार (Courtesy Handshake) को लेकर एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की, जिसमें उन्होंने खुद की पीठ थपथपाते हुए कई दावे किए। पाकिस्तान ने दावा किया कि डॉ. जयशंकर खुद अयाज सादिक के पास आए और हाथ मिलाया। पाकिस्तान ने कहा कि वह हमेशा से “संवाद, संयम और सहयोगात्मक उपायों” पर जोर देता रहा है। पाकिस्तान ने इसे भारत की ओर से बातचीत शुरू करने के संकेत के रूप में पेश करने की कोशिश की, जबकि भारत ने इसे केवल एक औपचारिक शिष्टाचार करार दिया है।
भारत का कड़ा रुख और ‘ऑपरेशन सिंदूर’
भारतीय पक्ष ने स्पष्ट किया है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।
- पहलगाम हमला: अप्रैल 2025 में कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की जान गई थी, जिसका जिम्मेदार भारत ने पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क को ठहराया था।
- ऑपरेशन सिंदूर: इस हमले के जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था, जिसके तहत सीमा पार आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की गई थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच 4 दिनों तक सैन्य टकराव भी हुआ था।
- सिंधु जल संधि (IWT): तनाव के चलते भारत ने सिंधु जल संधि में भागीदारी को भी निलंबित कर दिया है, जो पाकिस्तान के लिए एक बड़ा संकट है।
ढाका में हुआ यह हैंडशेक केवल एक कूटनीतिक औपचारिकता थी, लेकिन पाकिस्तान इसे अपनी “शांतिप्रिय छवि” बनाने और अंतरराष्ट्रीय दबाव को कम करने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। भारत का रुख अभी भी साफ है—जब तक पाकिस्तान आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई नहीं करता, औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता संभव नहीं है।


