भारतीय रुपया एक बार फिर दबाव में है। शुक्रवार, 13 मार्च 2026 को विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत 92.45 रुपये तक पहुंच गई है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक चिंताजनक संकेत है। डॉलर के मुकाबले रुपये में यह भारी गिरावट मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता का परिणाम मानी जा रही है।
रुपये में गिरावट के प्रमुख कारण:
- मध्य-पूर्व में युद्ध का साया: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ गया है।
- अनिश्चितता का माहौल: निवेशकों में बढ़ती अनिश्चितता के कारण वे सुरक्षित निवेश (जैसे डॉलर) की ओर भाग रहे हैं, जिससे भारतीय शेयर बाजार और मुद्रा (रुपया) पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
- आपूर्ति श्रृंखला में बाधा: अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण व्यापार प्रभावित हुआ है, जिसने रुपये की विनिमय दर को और कमजोर कर दिया है।
विपक्ष का केंद्र पर निशाना:
विपक्ष (कांग्रेस) ने रुपये की इस ऐतिहासिक गिरावट को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर इस आंकड़े को साझा करते हुए इसे सरकार की आर्थिक कुप्रबंधन का परिणाम बताया है।
इस गिरावट से न केवल देश में आयात महंगा हो जाएगा, बल्कि पेट्रोल-डीजल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी और इजाफा होने की आशंका है। जानकारों का मानना है कि यदि मध्य-पूर्व का संकट जल्द नहीं थमा, तो आने वाले दिनों में रुपया और अधिक कमजोर हो सकता है, जिससे आम आदमी का बजट बुरी तरह प्रभावित होगा।


