मुंबई में बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। हाल ही में आए चुनाव परिणामों में भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना (महायुति गठबंधन) ने जीत तो दर्ज कर ली है, लेकिन मेयर (महापौर) पद को लेकर गठबंधन के भीतर खींचतान शुरू हो गई है।
बीएमसी चुनाव परिणाम: एक नजर में
कुल 227 सीटों वाली बीएमसी में बहुमत के लिए 114 सीटों की आवश्यकता है। गठबंधन के आंकड़े इस प्रकार रहे:
- महायुति गठबंधन: 118 सीटें (बहुमत पार)
- भाजपा: 89 सीटें (सबसे बड़ी पार्टी)
- शिवसेना (एकनाथ शिंदे): 29 सीटें
- शिवसेना (UBT – उद्धव ठाकरे): 65 सीटें
- कांग्रेस: 24 सीटें
शिंदे की ‘होटल पॉलिटिक्स’ और मेयर पद का पेंच
चुनाव नतीजों के तुरंत बाद उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने नवनिर्वाचित पार्षदों (कॉर्पोरेटर्स) को मुंबई के बांद्रा स्थित एक लग्जरी होटल में शिफ्ट कर दिया है। इसे राजनीतिक गलियारों में ‘होटल पॉलिटिक्स’ के रूप में देखा जा रहा है।
- दावा: शिंदे गुट का तर्क है कि यह पार्षदों के लिए एक ‘ओरिएंटेशन प्रोग्राम’ है।
- रणनीति: असल में, शिंदे गुट मेयर पद पर अपना दावा ठोक रहा है। शिवसेना (शिंदे) के नेताओं का कहना है कि पार्टी संस्थापक बाल ठाकरे का जन्मशती वर्ष (23 जनवरी को 100वीं जयंती) होने के नाते, मुंबई का मेयर शिवसेना का ही होना चाहिए। वे ‘ढाई-ढाई साल’ (50-50 फॉर्मूला) के तहत पहले कार्यकाल के लिए मेयर पद की मांग कर रहे हैं।
फडणवीस के बयान से मची हलचल
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हालिया बयानों ने इस विवाद को और हवा दी है। जब उद्धव ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा कि “अगर ‘देवा’ (भगवान) चाहेंगे तो मेयर हमारा होगा,” तो फडणवीस ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
- ‘देवा’ बनाम ‘देवेंद्र’: फडणवीस ने मजाकिया लहजे में पूछा कि उद्धव के ‘देवा’ का मतलब भगवान है या ‘देवेंद्र’? उन्होंने स्पष्ट किया कि मेयर तो महायुति का ही होगा।
- सामूहिक निर्णय: हालांकि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन फडणवीस ने नरमी बरतते हुए कहा कि मेयर पद का फैसला वे, एकनाथ शिंदे और अन्य सहयोगी दल मिल-बैठकर लेंगे।
- ठाणे में अलग रुख: चर्चा यह भी है कि ठाणे नगर निगम में, जहाँ शिंदे गुट को स्पष्ट बहुमत मिला है, वहां भाजपा विपक्ष में बैठने का मन बना रही है।
आगे क्या?
23 जनवरी को बाल ठाकरे की 100वीं जयंती है। शिंदे गुट चाहता है कि उससे पहले मेयर पद पर सहमति बन जाए। भाजपा के लिए चुनौती यह है कि वह 89 सीटें जीतने के बाद भी क्या छोटे सहयोगी दल को मेयर की कुर्सी सौंपेगी या कोई नया बीच का रास्ता निकालेगी।


