कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि उन्होंने कभी भी संसद में पार्टी के आधिकारिक रुख का उल्लंघन नहीं किया है। कोझिकोड में केरल लिटरेचर फेस्टिवल (KLF) 2026 के दौरान एक सत्र में बोलते हुए उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर अपने पिछले बयानों का बचाव किया और माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया।
थरूर ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर ‘भारत प्रथम’ (India First) उनकी प्राथमिकता है।
मुख्य बिंदु:
- माफी से इनकार: थरूर ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर उनका रुख सैद्धांतिक था और वह इसके लिए “बिना किसी पछतावे” (unapologetic) के अपने बयान पर कायम हैं।
- पार्टी लाइन पर स्पष्टीकरण: उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद के भीतर उन्होंने हमेशा कांग्रेस की नीतियों का पालन किया है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ उनके लिए एकमात्र ऐसा विषय था जहाँ उन्होंने सार्वजनिक रूप से एक अलग लेकिन राष्ट्रहित में राय रखी थी।
- क्या था विवाद? * 2025 में, थरूर ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (आतंकवाद के खिलाफ भारत की एक सैन्य कार्रवाई) की प्रशंसा की थी और इसे आतंकवादियों को कड़ा जवाब देने के लिए जरूरी बताया था।
- उन्होंने पनामा में एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर कहा था कि मोदी सरकार के तहत पहली बार क्रॉस-बॉर्डर स्ट्राइक जैसी साहसिक कार्रवाई हुई, जिससे कांग्रेस के भीतर उनके खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया हुई थी।
- राष्ट्रहित सर्वोपरि: थरूर ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के प्रसिद्ध कथन “Who lives if India dies?” का जिक्र करते हुए कहा कि जब देश की सुरक्षा और वैश्विक मंच पर उसकी प्रतिष्ठा की बात आती है, तो राजनीतिक मतभेदों को पीछे छोड़ देना चाहिए।
’ऑपरेशन सिंदूर’ और थरूर का रुख
थरूर ने बताया कि एक लेखक और पर्यवेक्षक के तौर पर उन्होंने पहले ही लेखों के माध्यम से ‘पहलगाम आतंकी हमले’ के बाद कड़ी सैन्य कार्रवाई (kinetic response) की वकालत की थी। उनके अनुसार, जब सरकार ने वही कदम उठाया जो उन्होंने सुझाया था, तो उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर उसका समर्थन किया।
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