मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव, ‘राम नवमी’ के पावन अवसर पर आज अयोध्या नगरी पूरी तरह भक्ति के रंग में सराबोर है। नव्य और भव्य राम मंदिर के निर्माण के बाद यह जन्मोत्सव और भी अलौकिक हो गया है। ब्रह्म मुहूर्त से ही लाखों की संख्या में श्रद्धालु सरयू के तट पर जुटने लगे और जय श्री राम के उद्घोष से पूरी नगरी गुंजायमान हो उठी।
सरयू में आस्था की डुबकी
प्रशासनिक आंकड़ों और समाचारों के अनुसार, सुबह 9 बजे तक ही लगभग 10 लाख से अधिक भक्तों ने पावन सरयू नदी में पवित्र स्नान किया। श्रद्धालुओं का तांता राम की पैड़ी से लेकर गुप्तार घाट तक लगा हुआ है। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन सरयू में स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। भारी भीड़ को देखते हुए जल पुलिस और सुरक्षा बल चप्पे-चप्पे पर तैनात हैं।
साधु-संतों का उल्लास और पुष्पवर्षा
अयोध्या के प्रमुख मठों और मंदिरों में सुबह से ही ‘भय प्रकट कृपाला, दीनदयाला’ के मंगल गान और बधाई गीत गूंजने लगे। कनक भवन, हनुमानगढ़ी और राम जन्मभूमि परिसर में उत्सव का माहौल है। इस विशेष अवसर पर अयोध्या के वरिष्ठ साधु-संतों ने श्रद्धालुओं और राम लला के विग्रह पर पुष्पवर्षा की। संतों का कहना है कि त्रेता युग जैसी रौनक आज अयोध्या की गलियों में महसूस की जा सकती है। जगह-जगह भंडारों का आयोजन किया गया है और शंख व घंटों की ध्वनि से वातावरण आध्यात्मिक हो गया है।
राम लला का ‘सूर्य तिलक’ और विशेष दर्शन
इस बार रामनवमी का सबसे मुख्य आकर्षण राम मंदिर में राम लला का ‘सूर्य तिलक’ है। विज्ञान और अध्यात्म के इस अनूठे संगम को देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचे हैं। मंदिर प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए हैं ताकि हर भक्त को सुगमता से दर्शन प्राप्त हो सकें। सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए ड्रोन और एआई-आधारित कैमरों का उपयोग किया जा रहा है।
प्रशासन की चौकस व्यवस्था
उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं की भारी आवक को देखते हुए पूरे शहर को ‘मेला क्षेत्र’ घोषित किया है। जगह-जगह स्वास्थ्य शिविर, पेयजल और विश्राम स्थल बनाए गए हैं। अयोध्या की ओर आने वाले सभी मार्गों पर यातायात का डायवर्जन किया गया है ताकि पैदल चलने वाले भक्तों को कोई असुविधा न हो।
आज की अयोध्या केवल एक शहर नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का जीवंत केंद्र बनी हुई है। राम जन्मोत्सव के इस उल्लास ने यह सिद्ध कर दिया है कि राम और अयोध्या का संबंध समय की सीमा से परे है।


