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    राज्यसभा चुनाव: बिहार-ओडिशा में टूटे विपक्षी MLA, NDA ने सेंधमारी के दम पर पाई बड़ी बढ़त

    राज्यसभा चुनाव के परिणाम भारतीय राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बदलते समीकरणों की एक बड़ी तस्वीर पेश करते हैं। इन चुनावों में एनडीए (NDA) ने अपनी रणनीति और विपक्षी खेमे में सेंधमारी के दम पर बड़ी बढ़त हासिल की है। 2026 के ये चुनाव परिणाम बताते हैं कि एनडीए न केवल अपने गठबंधन को एकजुट रखने में सफल रहा है, बल्कि वह विपक्षी खेमों में सेंध लगाने की कला में भी माहिर हो गया है।

    मुख्य परिणाम और सांख्यिकी

    कुल 11 सीटों के लिए हुए मतदान में एनडीए ने अपना दबदबा कायम रखा। निर्वाचन के मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:

    क्षेत्रकुल सीटेंएनडीए (NDA)कांग्रेसबीजेडी (BJD)अन्य
    बिहार050500
    ओडिशा0403*0001
    हरियाणा020101
    कुल1109010100
    *ओडिशा में 2 भाजपा और 1 भाजपा समर्थित निर्दलीय शामिल हैं।

    राज्यों का विश्लेषण

    1. बिहार: एनडीए की ‘क्लीन स्वीप’

    बिहार में सभी 5 सीटों पर एनडीए के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। इनमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर, और उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं। विपक्ष (महागठबंधन) को यहाँ करारा झटका लगा, क्योंकि उनके कई विधायक मतदान से अनुपस्थित रहे, जिससे भाजपा के पांचवें उम्मीदवार शिवेश राम ने राजद के उम्मीदवार को आसानी से हरा दिया।

    2. ओडिशा: क्रॉस वोटिंग का खेल

    ओडिशा में 4 सीटों के लिए मुकाबला काफी दिलचस्प रहा। भाजपा ने अपने दो आधिकारिक उम्मीदवारों (मनमोहन सामल और सुजीत कुमार) को जिताने के साथ-साथ भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय को भी जीत दिलाने में सफलता पाई।

    • यहाँ बीजेडी (BJD) और कांग्रेस के करीब 11 विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर ‘क्रॉस वोटिंग’ की।
    • बीजेडी के खाते में केवल एक सीट (संतृप्त मिश्रा) आई।

    3. हरियाणा: कड़ा मुकाबला

    हरियाणा की 2 सीटों पर मुकाबला बराबरी का रहा। यहाँ भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर सिंह बौध ने जीत हासिल की। हालांकि, यहाँ भी मतदान के दौरान गोपनीयता उल्लंघन के आरोपों के कारण मतगणना में देरी हुई, लेकिन अंततः दोनों दलों ने एक-एक सीट साझा की।


    क्रॉस वोटिंग और भविष्य की राजनीति

    इन परिणामों ने विपक्षी एकता (INDIA ब्लॉक) की कमजोर कड़ियों को उजागर कर दिया है।

    • संगठनात्मक कमजोरी: बिहार और ओडिशा में विपक्षी विधायकों का टूटना यह दर्शाता है कि क्षेत्रीय दलों पर उनकी पकड़ ढीली हो रही है।
    • एनडीए की मजबूती: राज्यसभा में एनडीए की संख्या बढ़ने से अब सरकार के लिए महत्वपूर्ण बिलों को पारित कराना और भी आसान हो जाएगा।

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