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    राहुल बोले, अमेरिकी दबाव में हुई ट्रेड डील, BJP ने किया यह पलटवार

    भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक ट्रेड एग्रीमेंट (Trade Agreement) को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। मंगलवार, 3 फरवरी 2026 को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा पलटवार किया। गोयल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और विपक्षी दल ‘फरेब और झूठ’ के सहारे देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

    ​पीयूष गोयल के पलटवार की मुख्य बातें

    ​पीयूष गोयल ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें ‘नकारात्मकता का प्रतीक’ बताया। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

    • संसद में बाधा: गोयल ने कहा कि वे इस ऐतिहासिक समझौते की जानकारी संसद में देना चाहते थे, लेकिन विपक्ष के ‘शर्मनाक’ व्यवहार और हंगामे के कारण वे ऐसा नहीं कर पाए। उन्होंने राहुल गांधी की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि उनका भारत की प्रगति से कोई लेना-देना नहीं है।
    • चीन के साथ तुलना: गोयल ने याद दिलाया कि यूपीए सरकार के समय चीन के साथ FTA (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) करने की कोशिश की गई थी, जो भारत के हितों के खिलाफ था। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने इस डील के जरिए भारत के भविष्य को सुरक्षित किया है।
    • किसानों और डेयरी क्षेत्र की सुरक्षा: उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समझौते में कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है और इनके हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया गया है।
    • पड़ोसियों से बेहतर डील: मंत्री ने दावा किया कि भारत ने अपने प्रतिस्पर्धी पड़ोसी देशों की तुलना में अमेरिका से कहीं बेहतर शर्तें हासिल की हैं।

    ​समझौते के बड़े फायदे (जो सरकार ने बताए)

    ​सरकार के अनुसार, यह डील देश के 140 करोड़ लोगों के लिए अवसरों के नए द्वार खोलेगी:

    • टैरिफ में भारी कटौती: अमेरिका भारतीय सामानों पर टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने पर सहमत हुआ है।
    • निर्यात को बढ़ावा: टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, मरीन प्रोडक्ट्स और इंजीनियरिंग जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को अमेरिकी बाजार में बड़ी पहुंच मिलेगी।
    • तकनीकी निवेश: समझौते से भारत में नई अमेरिकी तकनीक, क्रिटिकल मिनरल्स और बड़े निवेश आने की संभावना है।

    ​राहुल गांधी का विरोध

    ​दूसरी ओर, राहुल गांधी और विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने यह समझौता अमेरिकी दबाव में किया है और इसमें पारदर्शिता की कमी है। उन्होंने मांग की कि सरकार को इस सौदे की सभी शर्तें और विशेष रूप से रूसी तेल की खरीद बंद करने जैसे मुद्दों पर संसद में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

    भारत और अमेरिका जल्द ही इस समझौते पर एक संयुक्त बयान (Joint Statement) जारी करेंगे, जिसके बाद इसके तकनीकी विवरण पूरी तरह सार्वजनिक किए जाएंगे।

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