भारत की सैन्य शक्ति में एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। फ्रांस के साथ हुए नए रक्षा समझौते के तहत, अब राफेल लड़ाकू विमान का सबसे अचूक हथियार ‘हैमर’ (HAMMER) मिसाइल भारत में ही बनाई जाएगी। यह कदम न केवल ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती देगा, बल्कि भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
क्या है हैमर मिसाइल? (AASM Hammer)
हैमर का पूरा नाम ‘Highly Agile Modular Munition Extended Range’ है। यह वास्तव में एक ‘स्मार्ट प्रिसिजन गाइडेड बम’ है। इसे एक ऐसी मॉड्यूलर किट के रूप में डिजाइन किया गया है, जिसे पारंपरिक बमों पर फिट करके उन्हें बेहद सटीक मिसाइल में बदला जा सकता है।
दुश्मन के बंकरों का ‘काल’ क्यों?
हैमर को दुश्मन के सबसे मजबूत सुरक्षा वाले ठिकानों को तबाह करने के लिए विशेष रूप से बनाया गया है:
- बंकर ब्लास्टर: यह मिसाइल कंक्रीट के कई मीटर मोटे और जमीन के अंदर गहरे बने बंकरों को भेदकर उनके परखच्चे उड़ाने की क्षमता रखती है।
- पहाड़ी इलाकों में अचूक: लद्दाख जैसे दुर्गम पहाड़ी इलाकों में, जहाँ दुश्मन गुफाओं या ऊँची चोटियों पर बंकर बनाकर छिपा होता है, हैमर वहां 1 मीटर से भी कम (CEP) की सटीकता के साथ वार करती है।
- ऑपरेशन सिंदूर में सफल परीक्षण: हालिया संघर्षों और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी इसकी मारक क्षमता की पुष्टि हो चुकी है, जहाँ इसने दुश्मन के कमांड सेंटर्स को मटियामेट कर दिया था।
मारक क्षमता और खासियतें
- रेंज: यह 60 से 70 किलोमीटर की दूरी से दुश्मन को निशाना बना सकती है। यानी भारतीय पायलट सीमा पार किए बिना ही दुश्मन के ठिकानों को ध्वस्त कर सकते हैं।
- मारो और भूल जाओ (Fire and Forget): एक बार टारगेट लॉक होने के बाद इसे आगे गाइड करने की जरूरत नहीं होती। यह जैमिंग-रेसिस्टेंट है, यानी दुश्मन के रडार या जैमर्स इसे रास्ता भटका नहीं सकते।
- मल्टीपल टारगेटिंग: एक राफेल जेट 6 हैमर मिसाइलें ले जा सकता है, जो एक साथ 6 अलग-अलग लक्ष्यों को तबाह कर सकती हैं।
- तेजस में भी होगा इस्तेमाल: यह मिसाइल इतनी लचीली है कि इसे राफेल के साथ-साथ भारत के स्वदेशी फाइटर जेट ‘तेजस’ (LCA Tejas) पर भी फिट किया जा सकेगा।
भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?
अभी तक भारत इन मिसाइलों को पूरी तरह फ्रांस से आयात करता था। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और फ्रांस की सफ्रान (Safran) के बीच हुए 50-50% के जॉइंट वेंचर के बाद मिसाइल के 60% पार्ट्स भारत में ही बनेंगे।
युद्ध की स्थिति में आपूर्ति के लिए दूसरे देश पर निर्भरता खत्म होगी। भारत अब अपनी विशिष्ट जरूरतों (जैसे विशेष वॉरहेड या नेविगेशन) के हिसाब से इसे कस्टमाइज कर सकेगा।
हैमर मिसाइल का भारत में निर्माण रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा मील का पत्थर है। यह न केवल पाकिस्तान के साथ लगी सीमा पर, बल्कि चीन के खिलाफ भी भारत की प्रतिरोधक क्षमता (Deterrence) को कई गुना बढ़ा देगा।


