कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के खिलाफ सुपर ओवर में मिली हार के बाद लखनऊ सुपर जाएंट्स (LSG) के कप्तान ऋषभ पंत की रणनीतियों पर सवालिया निशान लग गए हैं। क्रिकेट विशेषज्ञों और प्रशंसकों का मानना है कि सुपर ओवर में पंत के एक गलत फैसले ने लखनऊ के हाथ से जीत छीन ली और केकेआर को तोहफे में दो अंक दे दिए।
सुनील नरेन बनाम निकोलस पूरन: रणनीतिक चूक
मैच के सबसे निर्णायक मोड़ यानी सुपर ओवर में जब केकेआर ने गेंद अनुभवी स्पिनर सुनील नरेन को थमाई, तो लखनऊ की ओर से निकोलस पूरन को भेजना एक ‘ब्लंडर’ साबित हुआ।
- इतिहास का फेर: आंकड़ों के मुताबिक, सुनील नरेन के सामने निकोलस पूरन का रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है। नरेन की फिरकी को समझने में पूरन हमेशा संघर्ष करते दिखे हैं।
- पहली गेंद पर झटका: नरेन ने अपनी रणनीति के अनुरूप पहली ही गेंद ‘मिस्ट्री’ फेंकी और पूरन को क्लीन बोल्ड कर दिया। सुपर ओवर की पहली ही गेंद पर विकेट गिरने से लखनऊ की टीम दबाव में आ गई और पूरी टीम 2 रन से ज्यादा का लक्ष्य नहीं दे सकी।
विशेषज्ञों का तर्क: क्या बेहतर हो सकता था?
क्रिकेट पंडितों का मानना है कि ऋषभ पंत को क्रीज पर ऐसे बल्लेबाज को भेजना चाहिए था जो स्पिन को बेहतर खेल सके या नरेन की गेंदों को भांप सके।
- पंत का खुद न आना: कप्तान होने के नाते और स्पिन के खिलाफ अच्छे रिकॉर्ड के बावजूद ऋषभ पंत खुद बल्लेबाजी के लिए नहीं आए, जो चर्चा का विषय बना हुआ है।
- आयुष बदोनी का विकल्प: टीम के पास आयुष बदोनी जैसे युवा खिलाड़ी का विकल्प था जो दबाव में अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे, लेकिन टीम प्रबंधन ने अनुभव (पूरन) पर दांव लगाया जो उल्टा पड़ गया।
मैच का टर्निंग पॉइंट
लखनऊ की गेंदबाजी के दौरान प्रिंस यादव को सुपर ओवर देना भी एक जोखिम भरा फैसला माना जा रहा है। मात्र 2 रनों के बचाव के लिए किसी अनुभवी गेंदबाज (जैसे मोहसिन खान या मोहम्मद शमी) के बजाय युवा गेंदबाज को गेंद सौंपना केकेआर के लिए काम आसान कर गया। रिंकू सिंह ने पहली ही गेंद पर चौका मारकर मैच खत्म कर दिया।
ऋषभ पंत की कप्तानी में लखनऊ सुपर जाएंट्स इस सीजन में संघर्ष कर रही है। सुपर ओवर में नरेन के खिलाफ पूरन को भेजने का ‘जुआ’ न केवल फेल हुआ, बल्कि इसने लखनऊ को अंक तालिका के सबसे निचले पायदान (10वें स्थान) पर धकेल दिया है। आगामी मैचों में टीम को अपनी रणनीतियों पर गंभीरता से विचार करना होगा।


