पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी के बीच पार्टी ने सचिन पायलट को नई जिम्मेदारी दी है। पंजाब के प्रभारी महासचिव बनाए जाने के बाद पायलट अब संगठन को एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। उनका फोकस अलग-अलग खेमों में बंटे नेताओं को एक मंच पर लाने और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी को सामूहिक नेतृत्व में आगे बढ़ाने पर है।
वरिष्ठ नेताओं से शुरू होगी बातचीत
पायलट की रणनीति में पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग बातचीत अहम हिस्सा है। वह नेताओं की शिकायतें और उनके मतभेद सुनकर समाधान निकालने की कोशिश करेंगे। साथ ही उन्हें यह संदेश दिया जाएगा कि पार्टी में किसी एक नेता या गुट की नहीं, बल्कि सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। पायलट पहले ही संकेत दे चुके हैं कि पंजाब कांग्रेस के हर नेता और कार्यकर्ता को पार्टी के भविष्य में हिस्सेदार बनना होगा।
राहुल, प्रियंका और खरगे के नाम पर एकजुटता
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पायलट कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को एकजुटता के केंद्र में रखने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व का हवाला देकर प्रदेश के नेताओं को यह समझाने की कोशिश होगी कि व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर संगठन और चुनावी लक्ष्य को रखना होगा।
पायलट ने यह भी स्पष्ट किया है कि पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस किसी एक नेता को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने के बजाय सामूहिक नेतृत्व के साथ मैदान में उतर सकती है। उनके मुताबिक चुनाव अभियान में राहुल गांधी पार्टी के प्रमुख चेहरे होंगे।
चन्नी और वड़िंग खेमे की चुनौती
पंजाब कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के खेमों के बीच मतभेद लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। इसी विवाद को संभालना पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। इससे पहले भूपेश बघेल को दोनों पक्षों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन अपेक्षित नतीजे नहीं मिले। अब पायलट को अपेक्षाकृत संतुलित नेता के तौर पर यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
चन्नी ने पायलट की नियुक्ति का स्वागत करते हुए उन्हें सक्षम नेता बताया है और कहा है कि उनके आने से कार्यकर्ताओं में नई उम्मीद पैदा हुई है। दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी हाल के दिनों में राजा वड़िंग के नेतृत्व को लेकर अपने पुराने रुख में नरमी दिखाई है। इसे पार्टी के भीतर संभावित समझौते के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
AAP के खिलाफ साझा मोर्चे की तैयारी
पायलट की कोशिश केवल अंदरूनी विवाद खत्म करने तक सीमित नहीं है। वह पंजाब की भगवंत मान सरकार पर लगातार हमलावर हैं और कांग्रेस को आम आदमी पार्टी के खिलाफ मजबूत विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं। ऐसे में उनका पूरा प्लान संगठन को एकजुट करके चुनावी मैदान में कांग्रेस की ताकत बढ़ाने का है।
कांग्रेस के लिए पंजाब में चुनौती बड़ी है, लेकिन पायलट की रणनीति साफ है—पहले घर का झगड़ा खत्म हो, फिर चुनावी लड़ाई पूरी ताकत से लड़ी जाए।


