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    पुणे निकाय चुनाव: चाचा-भतीजा एक साथ, अजित पवार, सुप्रिया सुले ने जारी किया घोषणापत्र

    महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर और ‘पारिवारिक पुनर्मिलन’ देखने को मिल रहा है। पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम (PMC & PCMC) चुनावों के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुट—अजित पवार और शरद पवार—एक साथ आ गए हैं। शनिवार को उपमुख्यमंत्री अजित पवार और सांसद सुप्रिया सुले ने एक ही मंच पर आकर गठबंधन का साझा घोषणापत्र (Joint Manifesto) जारी किया।

    जुलाई 2023 में पार्टी में हुई फूट के बाद यह पहला मौका है जब अजित पवार और सुप्रिया सुले किसी राजनीतिक मंच पर साथ नजर आए हैं। 15 जनवरी को होने वाले मतदान से ठीक पहले इस कदम ने राज्य की सियासत में हलचल पैदा कर दी है।

    घोषणापत्र की मुख्य बातें:

    दोनों गुटों द्वारा जारी किए गए घोषणापत्र में पुणे के विकास के लिए कई बड़े वादे किए गए हैं:

    • इंफ्रास्ट्रक्चर: पुणे मेट्रो के विस्तार और ट्रैफिक की समस्या को सुलझाने के लिए ‘फ्लाईओवर नेटवर्क’ का वादा।
    • पानी की समस्या: शहर के हर घर को 24×7 स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना।
    • प्रदूषण नियंत्रण: ‘क्लीन पुणे, ग्रीन पुणे’ पहल के तहत इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाना और कचरा प्रबंधन (Waste Management) में सुधार।
    • सुरक्षा: पूरे शहर में सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाना और महिला सुरक्षा के लिए विशेष ‘पिंक स्क्वाड’ का गठन।

    राजनीतिक समीकरण और गठबंधन:

    दिलचस्प बात यह है कि राज्य स्तर पर अजित पवार की एनसीपी, भाजपा के साथ ‘महायुति’ का हिस्सा है, लेकिन पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ के स्थानीय चुनावों में उन्होंने भाजपा से अलग होकर अपने चाचा शरद पवार की पार्टी (NCP-SP) के साथ गठबंधन किया है।

    • प्रतीक चिन्ह: दोनों गुट अपने-अपने चुनाव चिन्ह (अजित गुट – ‘घड़ी’ और शरद गुट – ‘तुर्ही बजाता व्यक्ति’) पर चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन गठबंधन के तहत सीटों का बंटवारा किया गया है।
    • उद्देश्य: अजित पवार ने कहा कि स्थानीय स्तर पर वोटों के बिखराव को रोकने और पुणे के विकास के लिए ‘परिवार’ का साथ आना जरूरी था।

    भाजपा की प्रतिक्रिया:

    इस गठबंधन पर भाजपा ने तंज कसा है। केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल और अन्य भाजपा नेताओं ने इसे ‘अवसरवादी राजनीति’ करार दिया है। भाजपा का कहना है कि जो दल राज्य स्तर पर एक-दूसरे के खिलाफ हैं, वे सत्ता के लिए स्थानीय स्तर पर हाथ मिला रहे हैं।

    पुणे निकाय चुनाव अब ‘महायुति बनाम महाविकास अघाड़ी’ के बजाय ‘पवार परिवार बनाम भाजपा’ की लड़ाई में तब्दील हो गया है। चाचा-भतीजे के इस साथ आने का असर 16 जनवरी को आने वाले चुनावी नतीजों में साफ दिखेगा।

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