नई दिल्ली में आयोजित इंडिया-AI इम्पैक्ट समिट 2026 के चौथे दिन फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत की डिजिटल क्रांति की जमकर सराहना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में मैक्रों ने भारत के ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ (DPI) को वैश्विक मॉडल बताया। मैक्रों के संबोधन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं।
1. “नमस्ते” के साथ आत्मीय शुरुआत
राष्ट्रपति मैक्रों ने अपने संबोधन की शुरुआत “नमस्ते” कहकर की, जिससे हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने भारत और फ्रांस की गहरी दोस्ती का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देश तकनीक और संस्कृति के सेतु (Bridge) के रूप में साथ काम कर रहे हैं।
2. 140 करोड़ लोगों की डिजिटल पहचान
मैक्रों ने भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि आधार और डिजिटल पहचान को बताया। उन्होंने कहा:
- “भारत ने वह कर दिखाया है जो दुनिया के किसी अन्य देश ने नहीं किया। 140 करोड़ लोगों को एक सुरक्षित और पारदर्शी डिजिटल पहचान देना एक चमत्कार जैसा है।”
- उन्होंने जोर दिया कि भारत ने तकनीक का उपयोग ‘कंट्रोल’ करने के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों को ‘सशक्त’ बनाने के लिए किया है।
3. डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का ‘भारतीय मॉडल’
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने भारत के UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) की सफलता पर बात करते हुए कहा कि भारत ने साबित कर दिया है कि बड़े पैमाने पर तकनीक को कैसे लोकतांत्रिक बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यूरोप और दुनिया के अन्य देशों को भारत के इस ‘ओपन और इंक्लूसिव’ मॉडल से सीखना चाहिए।
4. AI और भविष्य की साझेदारी
मैक्रों ने एआई (Artificial Intelligence) के क्षेत्र में भारत के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई:
- टैलेंट पूल: उन्होंने भारत के विशाल इंजीनियर और डेटा वैज्ञानिकों के पूल की सराहना की।
- नैतिक AI: उन्होंने पीएम मोदी के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि AI को ‘ह्यूमन सेंट्रिक’ (मानव-केंद्रित) होना चाहिए, न कि केवल मुनाफे पर आधारित।
समिट का महत्व
यह संबोधन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फ्रांस और भारत के बीच हाल के वर्षों में रक्षा के बाद अब प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष के क्षेत्र में सबसे मजबूत संबंध बने हैं। मैक्रों का यह बयान भारत की उस छवि को वैश्विक स्तर पर पुख्ता करता है जहाँ भारत केवल एक ‘यूजर’ नहीं, बल्कि तकनीक का ‘क्रिएटर’ बन चुका है।


