ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद भारत के कई हिस्सों, विशेषकर कश्मीर और लखनऊ में शिया समुदाय के बीच भारी आक्रोश और शोक की लहर है। रविवार, 1 मार्च 2026 को मिली इस खबर के बाद से ही लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रमुख घटनाक्रम और प्रदर्शन के केंद्र
- कश्मीर घाटी में आक्रोश: श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक, सैदा कदल और बडगाम जैसे शिया बहुल इलाकों में सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हाथ में काले झंडे और खामेनेई की तस्वीरें लिए लोग इसे “पूरी मानवता पर प्रहार” बता रहे हैं।
- लखनऊ में मातम: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सआदतगंज और पुराने शहर के इलाकों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। मशहूर शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने तीन दिन के शोक का ऐलान किया है और लोगों से अपनी दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील की है।
- शांतिपूर्ण जुलूस और सुरक्षा: हालांकि प्रदर्शन बड़े स्तर पर हो रहे हैं, लेकिन अब तक ये शांतिपूर्ण रहे हैं। श्रीनगर और लखनऊ में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।
विरोध का मुख्य कारण
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अमेरिका और इजरायल ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत धोखे से हमला कर उनके आध्यात्मिक और राजनीतिक मार्गदर्शक की हत्या की है। कश्मीरी शिया समुदाय के लिए खामेनेई केवल एक विदेशी नेता नहीं, बल्कि एक ‘मरजा-ए-तकलीद’ (अनुकरण के स्रोत) थे।
लखनऊ में आज रात 8 बजे छोटे इमामबाड़े में एक विशाल शोकसभा और कैंडल मार्च का आयोजन किया जाना है।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि सरकार ईरान में फंसे कश्मीरी छात्रों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए केंद्र के संपर्क में है।


