ईरान और अमेरिका-इस्राइल के बीच जारी युद्ध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ‘एक्सियोस’ (Axios) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वाशिंगटन और तेल अवीव इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या ईरान के परमाणु भंडारों, विशेष रूप से संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के स्टॉक को सुरक्षित करने के लिए विशेष बलों (Special Forces) को जमीन पर उतारा जाए।
परमाणु हथियारों का खतरा और ‘एक्सियोस’ का दावा
रिपोर्ट में चार प्रमुख स्रोतों के हवाले से दावा किया गया है कि यह सैन्य अभियान युद्ध के अगले चरण का हिस्सा हो सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है।
- 11 बमों का ईंधन: अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के अनुसार, ईरान के पास इस समय लगभग 460 किलोग्राम यूरेनियम है, जो कि 60% तक संवर्धित है। यह मात्रा कम से कम 11 परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त है।
- अंडरग्राउंड ठिकाने: ईरान के फोर्डो (Fordow) जैसे परमाणु ठिकाने जमीन के काफी नीचे स्थित हैं, जहां केवल हवाई हमलों से पूरी तरह सफलता मिलना मुश्किल है। इसी कारण ‘ग्राउंड ऑपरेशन’ या विशेष बलों की तैनाती पर विचार किया जा रहा है।
युद्ध की वर्तमान स्थिति: ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’
28 फरवरी, 2026 को शुरू हुए इस युद्ध (कोडनेम: Operation Epic Fury) ने पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता को हिला दिया है।
| घटना | विवरण |
| सर्वोच्च नेतृत्व का अंत | 28 फरवरी के शुरुआती हमलों में आयतुल्ला अली खामेनेई और कई शीर्ष अधिकारियों की मौत हो गई। |
| मिसाइल क्षमता पर प्रहार | अमेरिका का दावा है कि ईरानी मिसाइल लॉन्च करने की क्षमता में 90% तक की गिरावट आई है। |
| परमाणु केंद्रों पर हमले | 3 मार्च को तेहरान के पास ‘मिन्जादेही’ परिसर और पारचिन (Parchin) सैन्य परिसर पर भीषण बमबारी की गई। |
अमेरिका का कड़ा रुख: ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण’
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ईरान के साथ किसी भी समझौते के पक्ष में नहीं हैं, जब तक कि वह “बिना शर्त आत्मसमर्पण” (Unconditional Surrender) नहीं कर देता। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी सोशल मीडिया पर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाली किसी भी इकाई को घातक परिणाम भुगतने होंगे।
विशेष बलों की तैनाती की चुनौतियां
ईरान का भूगोल (पहाड़ी इलाका) और वहां की 9 करोड़ की आबादी किसी भी जमीनी कार्रवाई को बेहद जोखिम भरा बनाती है। यदि विशेष बल परमाणु केंद्रों पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं, तो यह सीधे तौर पर एक पूर्ण स्तर के जमीनी युद्ध में तब्दील हो सकता है, जिससे तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव पड़ सकते हैं।


