पश्चिम एशियाई युद्ध अब एक निर्णायक और विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। इजरायली जनरलों और रक्षा विशेषज्ञों के हवाले से आई हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के गठबंधन ने अब ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) के फेज-3 (Phase 3) की शुरुआत कर दी है। दावा किया जा रहा है कि फेज-1 और फेज-2 के उतार-चढ़ाव के बाद, अब फेज-3 ईरान को घुटने टेकने पर मजबूर कर सकता है। आइए समझते हैं कि ये तीनों चरण क्या हैं और फेज-3 इतना घातक क्यों है:
अमेरिकी दबदबा (सर्ज और स्ट्राइक)
युद्ध के शुरुआती चरण में अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाई। विमान वाहक पोतों (Aircraft Carriers) की तैनाती और सीरिया-इराक में ईरान समर्थित गुटों पर हमलों के साथ अमेरिका ने दबाव बनाया। इस चरण में अमेरिका का पलड़ा भारी रहा क्योंकि उसने ईरान की प्रॉक्सी सेनाओं (जैसे हिजबुल्लाह और हूती) की कमर तोड़ दी।
ईरान की वापसी (मिसाइल और ड्रोन युद्ध)
दूसरे चरण में ईरान ने सीधे युद्ध में उतरकर सबको चौंका दिया। डिमोना परमाणु केंद्र और अराद शहर पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों ने इजरायल के ‘आयरन डोम’ को चुनौती दी। विशेषज्ञों का मानना है कि फेज-2 में ईरान ने अपनी ताकत दिखाकर मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल की और वैश्विक तेल आपूर्ति (होर्मुज की नाकेबंदी) को बाधित कर दुनिया को संकट में डाल दिया।
ताकि ईरान की अर्थव्यवस्था ढह जाए
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का फेज-3 सबसे खतरनाक माना जा रहा है। इजरायली सेना के मुताबिक, अब युद्ध का ‘ग्लाइड पाथ’ (Glide Path) अमेरिका के पक्ष में है। ईरान के सैन्य अड्डों के बजाय सीधे उसके आर्थिक और परमाणु ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है। ट्रंप के अल्टीमेटम के अनुसार, मुख्य लक्ष्य ईरान के बिजलीघरों (Power Plants) और तेल निर्यात केंद्रों को पूरी तरह तबाह करना है ताकि ईरान की अर्थव्यवस्था ढह जाए। इस चरण में केवल मिसाइलें नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर साइबर हमले और जमीनी स्तर पर मरीन (US Marines) की घुसपैठ शामिल है ताकि खार्ग द्वीप जैसे रणनीतिक ठिकानों पर कब्जा किया जा सके।
क्या ईरान टेक देगा घुटने?
इजरायली जनरलों का दावा है कि ईरान के पास अब रक्षा के विकल्प सीमित हैं। यदि फेज-3 में उसके तेल भंडार और बिजली संयंत्र नष्ट हो जाते हैं, तो ईरान के भीतर गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। हालांकि, ईरान ने भी चेतावनी दी है कि वह फेज-3 के जवाब में ‘सुसाइड ड्रोन’ और ‘एंटी-शिप मिसाइलों’ से पूरे क्षेत्र को आग के हवाले कर देगा।


