राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा घोषित JEE Main 2026 के परिणामों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सफलता केवल अंकों का खेल नहीं, बल्कि सटीक रणनीति और धैर्य का परिणाम है। दिल्ली के श्रेयस मिश्रा ने 100 परसेंटाइल हासिल कर ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1 प्राप्त की है, लेकिन उनकी यह जीत एक दिलचस्प मोड़ के साथ आई है।
एक सवाल गलत, एक छूटा: फिर भी 100 परसेंटाइल कैसे?
आमतौर पर माना जाता है कि 100 परसेंटाइल के लिए पूरे 300 में से 300 अंक चाहिए, लेकिन श्रेयस की कहानी अलग है। परीक्षा के बाद श्रेयस को लगा था कि वह पिछड़ जाएंगे क्योंकि:
- उनका एक सवाल गलत हो गया था।
- समय की कमी या संशय के कारण उन्होंने एक सवाल छोड़ दिया था।
सफलता का गणित: श्रेयस बताते हैं कि जब उन्होंने आंसर-की मिलाई, तो उन्हें लगा कि वे टॉप नहीं कर पाएंगे। लेकिन क्योंकि उस शिफ्ट का पेपर काफी कठिन (Tough) था, नॉर्मलाइजेशन (Normalization) प्रक्रिया के कारण उनके ‘रॉ स्कोर’ को 100 परसेंटाइल में बदल दिया गया। यह उनके लिए जीवन का सबसे बड़ा सरप्राइज रहा।
श्रेयस की सफलता के 3 मूल मंत्र
श्रेयस ने अपनी तैयारी के दौरान कुछ कड़े फैसले लिए, जिन्होंने उन्हें भीड़ से अलग खड़ा कर दिया:
1. डिजिटल डिटॉक्स (Social Media से दूरी)
श्रेयस ने तैयारी के दौरान अपने स्मार्टफोन से WhatsApp, Facebook और Instagram जैसे सभी सोशल मीडिया ऐप्स हटा दिए थे। उनका मानना है कि एकाग्रता (Focus) ही सबसे बड़ी शक्ति है।
2. 9वीं कक्षा से ही ‘तपस्या’
उन्होंने कक्षा 6 से ही बुनियादी तैयारी शुरू कर दी थी, लेकिन कक्षा 9 और 10 में उन्होंने एक बड़ा त्याग किया—दोस्तों से दूरी बनाना। उन्होंने अपना पूरा समय केवल पढ़ाई और सेल्फ-स्टडी को दिया। वे रोजाना 12 से 14 घंटे पढ़ाई करते थे।
3. ‘प्लान बी’ हमेशा तैयार
तनाव कम करने के लिए श्रेयस का माइंडसेट बहुत स्पष्ट था। उन्होंने कहा, “अगर JEE नहीं निकलता, तो मेरा प्लान-बी गणित में उच्च शिक्षा प्राप्त करना था, जैसे IISc बेंगलुरु से।” इस स्पष्टता ने उन्हें दबाव से मुक्त रखा।
परिवार और शौक का संतुलन
श्रेयस दिल्ली निवासी हैं। पढ़ाई के बोझ के बीच श्रेयस संगीत सुनना और क्रिकेट खेलना पसंद करते हैं, जिससे उन्हें मानसिक थकान दूर करने में मदद मिली।
”बुद्धिमत्ता केवल रटने में नहीं, बल्कि मुश्किल समय में सही निर्णय लेने में है।” — श्रेयस मिश्रा
श्रेयस अब अपना पूरा ध्यान JEE Advanced पर केंद्रित कर रहे हैं ताकि वे IIT बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर सकें।


