बांदा की विशेष अदालत ने उत्तर प्रदेश के काले इतिहास के सबसे वीभत्स अध्यायों में से एक पर अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। सिंचाई विभाग के निलंबित जूनियर इंजीनियर (JE) रामभवन और उसकी पत्नी अनुसूया को 34 मासूम बच्चों के यौन शोषण, उनके अश्लील वीडियो बनाने और उन्हें डार्क वेब पर 47 देशों में बेचने के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई गई है।
इंटरपोल की एक शिकायत और खुला राज
इस घिनौने कांड का पर्दाफाश भारतीय एजेंसियों ने नहीं, बल्कि इंटरपोल (Interpol) की एक टिप के आधार पर हुआ था।
- ग्लोबल नेटवर्क: इंटरपोल ने सीबीआई (CBI) को अलर्ट भेजा था कि उत्तर प्रदेश के बांदा से बड़े पैमाने पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी का कंटेंट डार्क वेब पर अपलोड किया जा रहा है।
- 47 देश: जांच में सामने आया कि आरोपी जेई इन मासूमों की अस्मत का सौदा अमेरिका, चीन और यूरोप सहित दुनिया के 47 देशों में कर रहा था।
34 मासूम और 74 गवाहों की गवाही
यह मामला जितना संवेदनशील था, इसकी कानूनी लड़ाई उतनी ही जटिल थी।
- पीड़ित: करीब 34 बच्चों के साथ दरिंदगी की पुष्टि हुई, जिनमें से कई की उम्र महज 5 से 12 साल के बीच थी।
- गवाह: अभियोजन पक्ष ने आरोपियों को सजा दिलाने के लिए 74 गवाहों को अदालत में पेश किया। इनमें पीड़ित बच्चे, उनके परिजन और फोरेंसिक एक्सपर्ट्स शामिल थे।
- पत्नी की भूमिका: जेई की पत्नी अनुसूया को भी बराबर का दोषी पाया गया। वह बच्चों को बहला-फुसलाकर घर लाती थी और इस कृत्य में अपने पति की मदद करती थी।
अदालत की सख्त टिप्पणी
विशेष न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए इस कृत्य को ‘क्रूरतम’ (Rarest of Rare) श्रेणी में रखा। अदालत ने कहा कि जिस समाज में बच्चों को भगवान का रूप माना जाता है, वहां एक सरकारी अधिकारी द्वारा इस तरह का कृत्य मानवता पर कलंक है।
सीबीआई ने इस मामले में भारी मात्रा में डिजिटल सबूत (लैपटॉप, मोबाइल, हार्ड डिस्क) बरामद किए थे, जो इस केस में सबसे बड़ी कड़ी साबित हुए। इस फैसले ने न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश में बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को कड़ा संदेश दिया है।


