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    बंगाल में PM मोदी की रैलियों का खाका तैयार, ममता बनर्जी के गढ़ में चुनौती देंगे

    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों का एक व्यापक और रणनीतिक खाका तैयार किया है। इस चुनाव प्रचार अभियान का मुख्य उद्देश्य राज्य की सत्ता से तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बेदखल करना और बीजेपी के ‘परिवर्तन’ के संकल्प को जमीन पर उतारना है।

    सिलीगुड़ी से आगाज: उत्तर बंगाल पर फोकस

    प्रधानमंत्री मोदी के बंगाल दौरे की शुरुआत उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी से होने की संभावना है। उत्तर बंगाल ऐतिहासिक रूप से बीजेपी का गढ़ रहा है, जहाँ 2021 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया था। सिलीगुड़ी की रैली के जरिए पीएम मोदी चाय बागान श्रमिकों और राजबंशी समुदाय को साधने की कोशिश करेंगे।

    भवानीपुर में आखिरी प्रहार: हाई-वोल्टेज मुकाबला

    बीजेपी के मास्टरप्लान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राजनीतिक गढ़ भवानीपुर में पीएम मोदी की रैली या रोड शो है। भवानीपुर में रैली कर बीजेपी यह संदेश देना चाहती है कि वह मुख्यमंत्री को उनके घर में ही चुनौती देने के लिए तैयार है। चुनाव के अंतिम चरणों में कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में पीएम मोदी की उपस्थिति शहरी मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    बीजेपी का इलेक्शन ब्लूप्रिंट

    बीजेपी ने राज्य को विभिन्न जोन में बांटकर क्षेत्रीय वार रूम सक्रिय कर दिए हैं। योजना के अनुसार, पीएम मोदी पूरे राज्य में 14 से अधिक बड़ी रैलियां कर सकते हैं। इसके अलावा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा भी दर्जनों जनसभाओं को संबोधित करेंगे। रैलियों में केंद्र सरकार की योजनाओं (जैसे पीएम आवास, उज्ज्वला) को राज्य में लागू न होने देने और ‘भ्रष्टाचार’ जैसे मुद्दों पर ममता सरकार को घेरा जाएगा।

    चुनाव कार्यक्रम (संक्षेप में)

    चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान की घोषणा की है:

    • पहला चरण: 23 अप्रैल, 2026 (152 सीटें)
    • दूसरा चरण: 29 अप्रैल, 2026 (142 सीटें)
    • नतीजे: 4 मई, 2026

    बीजेपी का ‘सिलीगुड़ी से भवानीपुर’ तक का यह रूट मैप भौगोलिक और राजनीतिक दोनों ही दृष्टि से बेहद संतुलित है। पार्टी का लक्ष्य पहले चरण में उत्तर बंगाल की अपनी बढ़त को बरकरार रखना और दूसरे चरण में दक्षिण बंगाल (खासकर कोलकाता बेल्ट) में टीएमसी के वोट बैंक में सेंध लगाना है।

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