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    ईरान से शांति वार्ता के बहाने ‘कब्जे’ का प्लान, पर्दे के पीछे साथ देगा पाकिस्तान?

    पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र में एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि अमेरिका, ईरान के रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप (Kharg Island) पर कब्जा करने की योजना बना रहा है और इस मिशन में पाकिस्तान की सेना एक ‘छद्म मोहरे’ (Proxy) के रूप में इस्तेमाल हो रही है।

    खार्ग द्वीप का महत्व और अमेरिकी योजना

    ईरान का खार्ग द्वीप उसके तेल निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र है। अमेरिका की योजना वहां सीधे हमला करने के बजाय, उसे अपने नियंत्रण में लेने की है ताकि ईरान की आर्थिक कमर पूरी तरह तोड़ी जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी नौसेना की ‘लैंड फोर्सेस’ (US Marines) इस द्वीप पर उतरने की तैयारी में हैं। सीधे हस्तक्षेप से बचने के लिए अमेरिका कथित तौर पर पाकिस्तान सेना के प्रमुख जनरल असीम मुनीर के साथ मिलकर एक गुप्त समझौता कर चुका है।

    असीम मुनीर का ‘धोखेबाजी वाला प्लान’

    लीक हुई जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान की भूमिका अमेरिका के लिए “समय खरीदने” (Buying Time) की है।पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व ने ईरान को यह भरोसा दिलाया है कि वे इस संघर्ष में तटस्थ (Neutral) रहेंगे और दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करेंगे। असल में, पाकिस्तानी सेना अमेरिका को ईरान की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की खुफिया जानकारी साझा कर रही है। ताकि जब अमेरिकी मरीन्स हमला करें, तो ईरान का ध्यान कहीं और भटका हुआ हो। यह भी संकेत मिले हैं कि अमेरिका पाकिस्तान के हवाई अड्डों का उपयोग टोही विमानों और ड्रोन के संचालन के लिए कर रहा है।

    ‘ऑपरेशन सुरूर’ और खुफिया दस्तावेज़

    रिपोर्टों में एक विशेष ‘ऑपरेशन सुरूर’ का जिक्र है, जो कथित तौर पर पाकिस्तान और अमेरिका के बीच इस सैन्य सहयोग का कोडनेम है। इस योजना का उद्देश्य ईरान के तटीय सुरक्षा तंत्र को पंगु बनाना है। ईरान ने पहले ही पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि यदि उसकी धरती का उपयोग ईरान के खिलाफ हुआ, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।

    पाकिस्तान की मजबूरी या रणनीति?

    विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अपनी खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए अमेरिका से मिलने वाली आर्थिक मदद और सुरक्षा गारंटी के बदले यह जोखिम उठा रहा है। हालांकि, यदि असीम मुनीर का यह ‘धोखेबाजी का प्लान’ पूरी तरह सार्वजनिक होता है, तो इससे न केवल ईरान-पाकिस्तान संबंध हमेशा के लिए खत्म हो सकते हैं, बल्कि क्षेत्र में एक नया युद्ध मोर्चा खुल सकता है।


    • टारगेट: ईरान का खार्ग द्वीप।
    • मुख्य खिलाड़ी: अमेरिकी मरीन्स और पाकिस्तानी सेना (असीम मुनीर)।
    • रणनीति: कूटनीतिक धोखेबाजी के जरिए ईरानी सुरक्षा में सेंध लगाना।
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