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    कुत्तों के काटने से मौत या चोट पर जुर्माना, 10 मिनट डिलीवरी पर ब्रेक

    आज यानी 13 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार की ओर से दो अत्यंत महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं, जिनका सीधा असर आम जनता और सेवा क्षेत्र पर पड़ेगा।

    1. आवारा कुत्तों का आतंक: सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

    सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के काटने (Stray Dog Bites) की बढ़ती घटनाओं पर मंगलवार को गहरी चिंता व्यक्त की है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की पीठ ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अब इस मामले में जवाबदेही तय की जाएगी।

    • मुआवजे की मार: कोर्ट ने कहा कि कुत्तों के काटने से होने वाली मौत या चोट के लिए राज्य सरकारों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है, क्योंकि वे एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों को लागू करने में विफल रही हैं।
    • फीडरों की जिम्मेदारी: कोर्ट ने कहा कि जो लोग सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाते हैं, उन्हें भी जवाबदेह ठहराया जा सकता है। जस्टिस नाथ ने टिप्पणी की, “यदि आपको उनसे इतना प्यार है, तो उन्हें अपने घर ले जाएं। वे सार्वजनिक स्थानों पर घूमकर लोगों को क्यों डराएं?” * इंसानी जान की कीमत: पीठ ने सवाल उठाया कि जब 9 साल की बच्ची पर हमला होता है, तो उसका जिम्मेदार कौन है? मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी 2026 को होगी।

    2. 10 मिनट डिलीवरी पर ब्रेक: सरकार का बड़ा फैसला

    क्विक कॉमर्स (Quick Commerce) कंपनियों के बीच चल रही ‘स्पीड वॉर’ पर केंद्र सरकार ने लगाम लगा दी है। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया के हस्तक्षेप के बाद ब्लिंकिट, जेप्टो, जोमैटो और स्विगी जैसी कंपनियों ने 10 मिनट की डिलीवरी गारंटी को हटाने का फैसला किया है।

    • गिग वर्कर्स की सुरक्षा: सरकार का मानना है कि 10 मिनट की सख्त समय सीमा डिलीवरी पार्टनर्स पर मानसिक दबाव डालती है, जिससे वे ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं और दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं।
    • कंपनियों का कदम: Blinkit ने पहले ही अपने विज्ञापनों और ब्रांडिंग से ’10 मिनट’ का दावा हटा दिया है। अब कंपनियां किसी तय समय के बजाय ‘फास्ट डिलीवरी’ जैसे शब्दों का उपयोग करेंगी।
    • सांसद की पहल: हाल ही में सांसद राघव चड्ढा ने खुद एक दिन डिलीवरी बॉय बनकर गिग वर्कर्स की चुनौतियों को उजागर किया था और संसद में उनकी सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा उठाया था।
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