अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित ‘गाजा बोर्ड ऑफ पीस’ (Gaza Board of Peace) में पाकिस्तान को शामिल करने के निमंत्रण ने मध्य-पूर्व की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। यह कदम न केवल पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक जीत माना जा रहा है, बल्कि इससे इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव भी बढ़ गया है।
मुख्य बिंदु और घटनाक्रम
- पाकिस्तान को न्योता: पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को इस बोर्ड में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का औपचारिक निमंत्रण मिला है।
- इजरायल विरोधी गुट का विस्तार: तुर्की और मिस्र के बाद पाकिस्तान ऐसा तीसरा प्रमुख देश है जिसे इस शांति बोर्ड में शामिल किया गया है। चूंकि पाकिस्तान इजरायल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता, इसलिए उसकी एंट्री को इजरायल के लिए एक झटके के रूप में देखा जा रहा है।
- नेतन्याहू की नाराजगी: इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस बोर्ड के गठन और इसमें शामिल देशों के चयन पर कड़ी आपत्ति जताई है। इजरायल का कहना है कि इस फैसले में उनकी राय नहीं ली गई और यह उनकी सुरक्षा नीतियों के विरुद्ध है।
शांति बोर्ड का उद्देश्य और शर्तें
ट्रंप प्रशासन ने गाजा में युद्ध के बाद शांति बहाली, पुनर्निर्माण और सुरक्षा के लिए इस बोर्ड का गठन किया है।
- सुरक्षा बल: पाकिस्तान ने गाजा में एक ‘अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल’ (ISF) का हिस्सा बनने की इच्छा जताई है, हालांकि उसने स्पष्ट किया है कि वह हमास को निहत्थे करने के किसी सैन्य अभियान में शामिल नहीं होगा।


