पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी भारी तनाव और वहां के नागरिकों पर पाकिस्तानी सेना द्वारा की जा रही बर्बरता को उजागर करती है। हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान सेना की कार्रवाई में कई स्थानीय आंदोलनकारी मारे गए हैं, जिन्हें अब पाकिस्तानी सेना ‘आतंकवादी’ करार देकर अपनी हिंसक कार्रवाई को सही ठहराने की कोशिश कर रही है।
असलियत छिपाने की साजिश: आंदोलनकारी या आतंकी?
PoK के स्थानीय लोग लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं, बढ़ती महंगाई, आटे की किल्लत और भारी बिजली कटौती के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सेना ने बल प्रयोग किया, जिसमें कई बेकसूर नागरिकों की जान चली गई।
अब अपनी साख बचाने और अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचने के लिए, पाकिस्तानी सेना एक नया नैरेटिव (बयानबाजी) गढ़ रही है। सेना का दावा है कि मारे गए लोग आम नागरिक नहीं, बल्कि प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े ‘आतंकवादी’ थे। स्थानीय जनता और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सेना के इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और इसे “फाउल प्ले” (साजिश) करार दिया है।
जनता पर बर्बरता और मानवाधिकारों का उल्लंघन
PoK के अलग-अलग हिस्सों से आ रही खबरें वहां के बदतर होते हालातों की गवाही दे रही हैं:
- अंधाधुंध बल प्रयोग: शांतिपूर्ण रैलियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए, लाठीचार्ज हुआ और कई जगहों पर सीधी फायरिंग की गई।
- अवैध गिरफ्तारियां: सेना और पुलिस ने प्रदर्शनों की अगुवाई कर रहे स्थानीय नेताओं और युवाओं को रात के अंधेरे में घरों से उठाकर जेलों में डाल दिया है।
- इंटरनेट और मीडिया पर बैन: PoK के कई इलाकों में इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया है ताकि वहां हो रही बर्बरता के वीडियो और खबरें दुनिया के सामने न आ सकें।
स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश
पाकिस्तानी सेना के इस बर्बर रवैये और झूठे आरोपों के बाद PoK के नागरिकों में गुस्सा और ज्यादा भड़क गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे सिर्फ अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें दबाने के लिए राज्य प्रायोजित हिंसा का सहारा लिया जा रहा है।
“हम अपने बच्चों के लिए रोटी और बिजली मांग रहे हैं, और बदले में हमें आतंकवादी कहकर गोलियां मारी जा रही हैं।” — PoK के एक स्थानीय प्रदर्शनकारी का बयान
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस बात को लेकर चिंता जताई जा रही है कि पाकिस्तान अपने ही नियंत्रण वाले इलाके में मानवाधिकारों का खुलेआम उल्लंघन कर रहा है और सच को दबाने के लिए पूरी ताकत का इस्तेमाल कर रहा है।


