पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है जहां आम जनता के लिए जीवनयापन करना लगभग असंभव होता जा रहा है। अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई उछाल का सबसे घातक असर पाकिस्तान पर पड़ा है। सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में 43% से 55% तक की ऐतिहासिक वृद्धि की घोषणा की है।
नई कीमतें और लेवी का गणित
3 अप्रैल 2026 से लागू हुई नई दरों ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है:
- पेट्रोल: ₹137.23 की बढ़ोतरी के साथ अब यह ₹458.41 प्रति लीटर हो गया है।
- डीजल: ₹184.49 के भारी उछाल के साथ अब इसकी कीमत ₹520.35 प्रति लीटर पहुंच गई है।
- लेवी: सरकार ने पेट्रोल पर पेट्रोलियम लेवी बढ़ाकर ₹160 प्रति लीटर कर दी है, हालांकि डीजल पर इसे शून्य रखा गया है ताकि माल ढुलाई पर असर कम हो।
पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने इसे एक “कठिन लेकिन जिम्मेदार फैसला” बताया है, जिसे सैन्य नेतृत्व और प्रांतीय सरकारों की सहमति से लिया गया है।
राहत के लिए ‘सब्सिडी’ का मरहम
बढ़ती महंगाई के बीच सरकार ने कुछ चुनिंदा वर्गों के लिए राहत उपायों की घोषणा की है:
- दोपहिया वाहन: बाइक सवारों को 3 महीने तक प्रति माह 20 लीटर पेट्रोल पर ₹100/लीटर की सब्सिडी मिलेगी।
- परिवहन क्षेत्र: खाद्य आपूर्ति वाले ट्रकों को ₹70,000 और बड़े ट्रकों को ₹80,000 प्रति माह की सहायता दी जाएगी।
- सार्वजनिक वाहन: इंटर-सिटी बसों को ₹1 लाख प्रति माह और रेलवे को भी सब्सिडी मिलेगी ताकि किराया न बढ़े।
- किसान: छोटे किसानों को फसल के समय ₹1,500 प्रति एकड़ की एकमुश्त सहायता दी जाएगी।
वैश्विक युद्ध का साया
ईरान और इस्राइल के बीच छिड़े संघर्ष ने तेल आपूर्ति की श्रृंखला को बाधित कर दिया है। पाकिस्तान जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर हैं, इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और दूसरी तरफ वैश्विक तेल बाजार में लगी आग ने पाकिस्तानी आवाम के लिए ‘त्राहिमाम’ जैसी स्थिति पैदा कर दी है।


