देश में मानसून का एक अनोखा और दोहरा रूप देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश और भूस्खलन (लैंडस्लाइड) ने तबाही मचा रखी है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर और मध्य भारत के मैदानी इलाकों में मानसूनी सिस्टम कमजोर पड़ गया है, जिससे लोग भीषण उमस और गर्मी से परेशान हैं।
पहाड़ी राज्यों में तबाही और अलर्ट
पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश आफत बन चुकी है। नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है:
- जम्मू-कश्मीर: पहलगाम में बादल फटने (cloudburst) से अचानक बाढ़ आ गई, जिससे घरों, खेतों और सड़कों को भारी नुकसान पहुंचा है। चिनाब नदी में उफान आने के कारण रियासी जिले में स्थित सलाल डैम के गेट खोलने पड़े हैं।
- उत्तराखंड: विकासनगर में लखवाड़ हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास भारी भूस्खलन हुआ है, जिसमें कई गाड़ियां और मशीनें दब गईं। राज्य में दो नेशनल हाईवे समेत करीब 126 सड़कें बंद हैं। रुद्रप्रयाग में मलबे के कारण केदारनाथ यात्रा भी बाधित हुई है, जबकि यमुनोत्री हाईवे स्यानचट्टी में लैंडस्लाइड की वजह से पिछले तीन दिनों से ठप है।
- चेतावनी: मौसम विभाग (IMD) ने अगले 24 घंटों के लिए हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश, अचानक बाढ़ (flash floods) और भूस्खलन का रेड/ऑरेंज अलर्ट जारी कर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
मैदानी इलाकों में मानसून क्यों पड़ा कमजोर?
इसके विपरीत दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे मैदानी इलाकों में बारिश की गतिविधियां थम सी गई हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इसके दो मुख्य कारण हैं:
- पश्चिमी शुष्क हवाएं: पाकिस्तान की ओर से आ रही गर्म और सूखी पश्चिमी हवाओं ने भारत में मानसूनी हवाओं को रोक दिया है, जिससे वातावरण में नमी कम हो गई है और बादल नहीं बन पा रहे हैं।
- लो-प्रेशर सिस्टम की कमी: 9 जुलाई के बाद बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत कम दबाव का क्षेत्र (low-pressure system) नहीं बना, जो मानसून को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी नमी देता है। इसके अलावा, मानसून ट्रफ (बारिश की रेखा) अपनी सामान्य स्थिति से खिसक कर उत्तर (हिमालय की तलहटी) की ओर चली गई है।
आगे क्या है मौसम विभाग का अनुमान?
मौसम विभाग के अनुसार, देश के लगभग 70% हिस्से से फिलहाल मानसून के बादल गायब हैं और अगले कुछ दिनों तक मैदानी इलाकों में इसके दोबारा सक्रिय होने की उम्मीद कम है। हालांकि, प्रशांत महासागर में 3 नए सिस्टम बन रहे हैं। यदि इनमें से कोई भी बंगाल की खाड़ी तक पहुंचता है, तो मानसून फिर से रफ्तार पकड़ सकता है।
फिलहाल बारिश मुख्य रूप से पहाड़ी क्षेत्रों, पूर्वी राज्यों (बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल) और पूर्वोत्तर (असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश) तक ही सीमित रहने वाली है, जहां भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।


