तृणमूल कांग्रेस (TMC) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बाद अब महाराष्ट्र के विपक्षी खेमे से एक और बड़ी राजनीतिक हलचल सामने आ रही है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) पर एक बार फिर बगावत के काले बादल मंडरा रहे हैं।
इस सियासी संकट के बीच दिल्ली में बुलाई गई संसदीय दल की महत्वपूर्ण बैठक से कई सांसदों के नदारद रहने के बाद पार्टी के भीतर की दरार खुलकर सामने आ गई है। इसे महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ का नाम दिया जा रहा है।
संसदीय दल की बैठक और सांसदों की बगावत
पार्टी के भीतर टूट की अटकलों को रोकने और अपनी ताकत को परखने के लिए शिवसेना (यूबीटी) ने दिल्ली स्थित संसद परिसर में एक आपातकालीन संसदीय दल की बैठक बुलाई थी।
- तीन लाइन का व्हिप जारी: मुख्य सचेतक (Chief Whip) अनिल देसाई द्वारा सभी 9 लोकसभा सांसदों को अनिवार्य रूप से इस बैठक में भौतिक रूप से (Physically) उपस्थित रहने का व्हिप जारी किया गया था।
- बैठक से गायब रहे सांसद: इस महत्वपूर्ण बैठक में उद्धव ठाकरे के केवल 3 वफादार सांसद (संजय राउत, अरविंद सावंत और अनिल देसाई) ही पहुंचे, जबकि 6 अन्य लोकसभा सांसद बैठक से नदारद रहे।
बैठक से सांसदों की इस अनुपस्थिति ने उन अटकलों पर मुहर लगा दी है, जिसमें दावा किया जा रहा था कि पार्टी के 9 में से 6 से 7 सांसद सत्तारूढ़ एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की योजना बना रहे हैं।
संजय राउत का तीखा हमला और 7 दिनों का अल्टीमेटम
इस बड़ी बगावत की आहट पर शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बेहद कड़ा और आक्रामक रुख अपनाया है।
- ‘मनी पावर’ का आरोप: राउत ने दावा किया कि पाला बदलने के लिए सांसदों को ₹50 करोड़ तक का ऑफर दिया जा रहा है और ₹15 करोड़ एडवांस में दिए जा चुके हैं।
- इस्तीफे की चुनौती: राउत ने कहा, “जिन्हें भी पार्टी छोड़कर जाना है, वे पहले सांसद पद से इस्तीफा दें और फिर जनता के बीच जाकर जनादेश लें। ठाकरे के नाम और कार्यकर्ताओं की मेहनत पर चुनाव जीतने वाले गद्दारों को महाराष्ट्र की जनता माफ नहीं करेगी।”
- 7 दिनों में मांगा जवाब: व्हिप का उल्लंघन करने और बैठक से गायब रहने वाले सभी बागी सांसदों को कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई और अयोग्यता (Disqualification) की चेतावनी देते हुए तत्काल जवाब तलब किया गया है।
अयोग्यता से बचने का कानूनी पेंच
साल 2022 में एकनाथ शिंदे द्वारा की गई ऐतिहासिक बगावत से सबक लेते हुए उद्धव खेमे ने इस बार तुरंत कानूनी मोर्चा संभाल लिया है।
- पार्टी नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) ओम बिरला से मुलाकात कर एक कैविएट पत्र सौंपा है।
- यूबीटी नेताओं का तर्क है कि दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत अब किसी ‘अलग गुट’ को मान्यता नहीं दी जा सकती; केवल पूरी पार्टी का ही विलय संभव है।
- दूसरी तरफ, बागी सांसदों को अयोग्यता से बचने के लिए कुल 9 में से दो-तिहाई सांसदों (कम से कम 6 सांसद) के समर्थन की आवश्यकता होगी, जिसे हासिल करने के लिए दिल्ली से मुंबई तक कूटनीतिक बिसात बिछाई जा चुकी है।


