अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 10% वैश्विक टैरिफ (Universal Baseline Tariff) लगाने की घोषणा के बाद भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। ट्रंप ने साफ किया है कि भारत पर पूर्व में चर्चा किए गए 18% टैरिफ के बजाय केवल 10% वैश्विक शुल्क ही लागू होगा। साथ ही, उन्होंने भरोसे के साथ कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापक व्यापार समझौते (Trade Deal) में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
भारत के लिए ‘विशिष्ट’ रियायत?
21 फरवरी 2026 को दिए गए अपने बयान में ट्रंप ने भारत के साथ अपने “विशेष संबंधों” का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि हालांकि वह अमेरिकी उद्योगों को बचाने के लिए वैश्विक टैरिफ लगा रहे हैं, लेकिन भारत के साथ किए गए द्विपक्षीय वादों का सम्मान किया जाएगा।
- 18% का डर खत्म: इससे पहले कयास लगाए जा रहे थे कि भारत के कुछ विशिष्ट उत्पादों (जैसे आईटी सेवाएं और फार्मा) पर 18% तक का दंडात्मक शुल्क लग सकता है। अब इसे घटाकर 10% के सामान्य स्तर पर रखने की बात कही गई है।
- ट्रेड डील सुरक्षित: ट्रंप ने जोर देकर कहा, “भारत के साथ हमारा व्यापार समझौता शानदार है। वैश्विक शुल्क एक अलग प्रक्रिया है, लेकिन हमारे द्विपक्षीय समझौते के मूल प्रावधान और रियायतें वैसी ही रहेंगी जैसी तय हुई थीं।”
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर
यह घोषणा उस समय आई है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पुराने टैरिफ आदेशों को रद्द कर दिया था। कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने ‘सेक्शन 122’ के तहत नया 10% शुल्क लगाया है। भारत के संदर्भ में उनका यह नरम रुख दर्शाता है कि वे नई दिल्ली के साथ व्यापारिक युद्ध (Trade War) के बजाय सहयोग की नीति जारी रखना चाहते हैं।
भारतीय निर्यातकों और बाजार पर प्रभाव
ट्रंप के इस बयान से भारतीय बाजारों और निर्यातकों ने राहत की सांस ली है:
- आईटी और फार्मा सेक्टर: अमेरिका भारतीय सॉफ्टवेयर सेवाओं और दवाओं का सबसे बड़ा खरीदार है। 10% का स्थिर शुल्क कंपनियों के लिए ‘मैनेजेबल’ माना जा रहा है।
- व्यापार घाटा: अमेरिका उन चुनिंदा देशों में से एक है जिनके साथ भारत का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) है। ट्रेड डील में बदलाव न होने से भारत का निर्यात प्रदर्शन स्थिर रहने की उम्मीद है।
- निवेश का माहौल: अनिश्चितता खत्म होने से अमेरिकी कंपनियों का भारत में निवेश (FDI) और भारतीय स्टार्टअप्स में रुचि बरकरार रहेगी।


