भारतीय चुनाव आयोग की ओर से पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश (सेवानिवृत्त) को अपनी पहचान और नागरिकता संबंधी दस्तावेजों के सत्यापन के लिए नोटिस जारी किया गया है। यह कार्रवाई मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के तहत की गई है, जिसके कारण एक प्रतिष्ठित सैन्य अधिकारी को अपनी पहचान साबित करने के लिए कार्यालय बुलाया गया है।
मामला क्या है?
रिटायरमेंट के बाद वर्तमान में गोवा में रह रहे एडमिरल प्रकाश का नाम 2002 में अपडेट की गई मतदाता सूची में नहीं मिल रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, वह ‘अनमैप्ड’ (Unmapped) श्रेणी में आते हैं। इस तकनीकी विसंगति को दूर करने के लिए चुनाव आयोग ने उन्हें और उनकी पत्नी को व्यक्तिगत रूप से बैठक में उपस्थित होने को कहा है।
एडमिरल प्रकाश की नाराजगी और सुझाव
एडमिरल प्रकाश ने सोशल मीडिया (X) के माध्यम से इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और चुनाव आयोग को महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
- फॉर्म में सुधार: उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान SIR फॉर्म से जरूरी जानकारी नहीं मिल पा रही है, तो आयोग को फॉर्म के प्रारूप में बदलाव करना चाहिए ताकि नागरिकों को असुविधा न हो।
- बीएलओ (BLO) की भूमिका: उन्होंने सुझाव दिया कि जब बीएलओ तीन बार उनके घर आए थे, तो वे अतिरिक्त जानकारी वहीं प्राप्त कर सकते थे। बुजुर्ग नागरिकों को दफ्तर बुलाना अनुचित है।
- बुजुर्गों के प्रति संवेदनशीलता: एडमिरल (82 वर्ष) और उनकी पत्नी (78 वर्ष) को 18 किलोमीटर दूर दो अलग-अलग तारीखों पर बुलाया गया, जिसे उन्होंने प्रशासनिक अदूरदर्शिता बताया।
एडमिरल अरुण प्रकाश का गौरवशाली करियर
एडमिरल अरुण प्रकाश देश के उन चुनिंदा सैन्य अधिकारियों में से हैं जिन्होंने युद्ध के मैदान से लेकर नेतृत्व तक बेमिसाल योगदान दिया है:
| विवरण | जानकारी |
| पदकाल | 31 जुलाई 2004 से 30 अक्टूबर 2006 तक (नौसेना अध्यक्ष) |
| प्रमुख कमान | विमानवाहक पोत INS विराट, चार युद्धपोत और फाइटर स्क्वाड्रन |
| प्रमुख सम्मान | परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM), वीर चक्र (VrC), AVSM, VSM |
| योगदान | 1971 के युद्ध में वीरता के लिए ‘वीर चक्र’ से सम्मानित |
एसआईआर (SIR) का उद्देश्य
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को शत-प्रतिशत सटीक बनाना और फर्जी नामों को हटाना है। हालांकि, एडमिरल प्रकाश जैसे राष्ट्रीय नायक को नोटिस मिलने से इस प्रक्रिया की डिजिटल कमियों और बुजुर्गों के प्रति संवेदनहीनता पर बहस छिड़ गई है। प्रशासनिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि क्या डेटा माइग्रेशन के दौरान पुरानी सूचियों में नाम होने के बावजूद उन्हें ‘अनमैप्ड’ श्रेणी में डालना सिस्टम की बड़ी चूक है।


