प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज, 6 फरवरी 2026 को ‘परीक्षा पे चर्चा’ (PPC) के 9वें संस्करण में देशभर के करोड़ों ‘एग्जाम वॉरियर्स’ के साथ संवाद किया। दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इस मुख्य कार्यक्रम में पीएम ने छात्रों को जीवन और परीक्षा के बीच संतुलन बनाने का मंत्र दिया।
प्रधानमंत्री ने सपनों और हकीकत के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए एक बेहद प्रभावशाली बात कही:
“सपने न देखना क्राइम है, लेकिन उन्हें सिर्फ गुनगुनाते रहना भी बेकार है। सपनों को संकल्प में बदलना पड़ता है और संकल्प को सिद्धि तक ले जाने के लिए परिश्रम की आहुति देनी पड़ती है।”
संवाद के प्रमुख अंश:
1. पैटर्न बदलना जरूरी, लेकिन मूल नहीं: एक छात्र के सवाल पर पीएम ने अपनी कार्यशैली का उदाहरण देते हुए कहा कि वह भी समय के साथ अपना पैटर्न बदलते हैं, लेकिन अपने मूल उद्देश्यों से नहीं भटकते। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि परीक्षा के अंतिम समय में नई चीजें अपनाने के बजाय अपनी मजबूती पर भरोसा रखें।
2. स्किल्स का महत्व (लाइफ बनाम प्रोफेशनल): पीएम ने कहा कि आज के दौर में केवल किताबी ज्ञान काफी नहीं है। उन्होंने दो तरह की स्किल्स पर जोर दिया:
- प्रोफेशनल स्किल्स: जो आपको रोजगार दिलाती हैं।
- लाइफ स्किल्स: जो आपको जीवन की विपरीत परिस्थितियों में खड़ा रहना सिखाती हैं।
3. सोशल मीडिया और ध्यान भटकना: डिजिटल डिस्ट्रैक्शन पर बात करते हुए पीएम ने छात्रों से ‘डिजिटल फास्टिंग’ (Digital Fasting) का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग एक उपकरण की तरह करें, उसके गुलाम न बनें।
4. अभिभावकों को नसीहत: प्रधानमंत्री ने माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों की तुलना दूसरों से न करें। उन्होंने कहा, “हर बच्चा अद्वितीय (Unique) है। अभिभावकों का दबाव अक्सर बच्चों की नैसर्गिक प्रतिभा को दबा देता है।”
5. संतुलन ही सफलता की कुंजी: पीएम ने एक छात्र द्वारा गाए गए गाने “बढ़ता चल, तू बढ़ता चल” की सराहना की और संदेश दिया कि पढ़ाई, खेल और शौक के बीच संतुलन बनाए रखना ही समग्र विकास है।
एक जन आंदोलन बनी ‘परीक्षा पे चर्चा’
इस वर्ष इस कार्यक्रम ने इतिहास रच दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 4.5 करोड़ से अधिक पंजीकरण हुए, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा छात्र-केंद्रित संवाद कार्यक्रम बनाता है। बोर्ड परीक्षाओं से ठीक पहले पीएम का यह संबोधन छात्रों में नई ऊर्जा भरने का काम कर रहा है।


