बिहार के कद्दावर नेता और पांच बार के विधायक नितिन नवीन ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालते ही संगठन में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। 20 जनवरी 2026 को आधिकारिक रूप से अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने आगामी चुनावों और संगठनात्मक मजबूती के लिए महत्वपूर्ण नियुक्तियां की हैं।
नितिन नवीन की इस “चुनावी मोड” वाली कार्यशैली की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
प्रमुख नियुक्तियां और जिम्मेदारियां
अध्यक्ष बनने के तुरंत बाद नितिन नवीन ने कई राज्यों के लिए चुनाव प्रभारियों (Election In-charges) की घोषणा की है, जिससे यह स्पष्ट है कि उनका ध्यान आगामी विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों पर केंद्रित है:
- केरल: वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े को केरल का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया है। भाजपा केरल में अपने आधार विस्तार को लेकर काफी गंभीर है।
- ग्रेटर बेंगलुरु: दिग्गज रणनीतिकार राम माधव को बेंगलुरु नगर निगम (BBMP) चुनावों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- अन्य क्षेत्र: तेलंगाना के स्थानीय निकाय चुनावों और चंडीगढ़ के लिए भी विशेष प्रभारियों की नियुक्ति की गई है।
नितिन नवीन: एक युवा और अनुभवी चेहरा
45 वर्षीय नितिन नवीन भाजपा के अब तक के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। उन्होंने जगत प्रकाश नड्डा का स्थान लिया है। उनके चयन के पीछे कई बड़े कारण माने जा रहे हैं:
- संगठनात्मक कौशल: वह बिहार के बांकीपुर से पांच बार के विधायक रहे हैं और छत्तीसगढ़ के प्रभारी के रूप में अपनी सांगठनिक क्षमता साबित कर चुके हैं।
- पीढ़ीगत परिवर्तन: उनकी नियुक्ति भाजपा में “जेनरेशनल शिफ्ट” यानी युवा नेतृत्व को आगे लाने की रणनीति का हिस्सा है।
- बिहार कनेक्शन: वह बिहार से भाजपा के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, जो पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के आगामी चुनावों में भी पार्टी को रणनीतिक लाभ पहुंचा सकते हैं।
भविष्य की चुनौतियां
नितिन नवीन के नेतृत्व में भाजपा को आने वाले समय में पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में विधानसभा चुनावों का सामना करना है। कार्यभार संभालने के दौरान उनके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा जैसे दिग्गज नेता मौजूद थे, जो उनके प्रति शीर्ष नेतृत्व के भरोसे को दर्शाता है।


