आज के दौर में जहां युवा इंजीनियरिंग की डिग्री के बाद भारी-भरकम पैकेज वाली नौकरियों के पीछे भागते हैं, वहीं निष्ठा चौहान जैसी बेटियों ने अपनी राह खुद चुनी है। अहमदाबाद की रहने वाली निष्ठा ने केवल 80 हजार रुपये के निवेश से एक ऐसा बिजनेस खड़ा किया, जिसका टर्नओवर आज 1 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। उनकी यह कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपनी जड़ों से जुड़कर कुछ नया करना चाहते हैं।
इंजीनियरिंग छोड़ चुना ‘मिलेट्स’ का रास्ता
निष्ठा चौहान ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। पढ़ाई के बाद उन्होंने किसी मल्टीनेशनल कंपनी में जाने के बजाय अपने राज्य के पारंपरिक खान-पान और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी। उन्होंने देखा कि आधुनिक जीवनशैली में लोग बीमार हो रहे हैं और हमारे पारंपरिक मोटे अनाज (मिलेट्स) जैसे कोदरा, रागी और बाजरा थाली से गायब हो रहे हैं।
इसी सोच के साथ उन्होंने ‘आरंभ कैफे’ की शुरुआत की। निष्ठा का उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि लोगों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना और स्थानीय किसानों को बढ़ावा देना था।
सिर्फ 80 हजार से 1 करोड़ तक का सफर
निष्ठा ने इस स्टार्टअप की शुरुआत बेहद छोटे स्तर पर की थी। उन्होंने अपनी बचत के मात्र 80 हजार रुपये से एक छोटा सा आउटलेट खोला। एक मैकेनिकल इंजीनियर होने के नाते उन्होंने कैफे के ऑपरेशनल मैनेजमेंट और मिलेट्स से बने उत्पादों की प्रोसेसिंग में तकनीकी सूझबूझ का इस्तेमाल किया। उनके कैफे में मिलेट्स से बने पिज्जा, बर्गर, मोमोज और पारंपरिक डिशेज को आधुनिक तड़के के साथ परोसा गया, जिसे युवाओं ने खूब पसंद किया।
स्थानीय किसानों और महिलाओं को मिला रोजगार
निष्ठा के इस ‘इंजीनियरिंग दिमाग’ वाले स्टार्टअप ने न केवल उन्हें सफल उद्यमी बनाया, बल्कि समाज में भी बदलाव लाया:
- किसानों की मदद: वे सीधे स्थानीय किसानों से मोटे अनाज खरीदती हैं, जिससे बिचौलियों का रोल खत्म हुआ और किसानों को फसल का सही दाम मिला।
- महिला सशक्तिकरण: उनके कैफे और प्रोसेसिंग यूनिट में कई स्थानीय महिलाएं काम कर रही हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही हैं।
- स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता: ग्लूटेन-फ्री और पोषक तत्वों से भरपूर मिलेट्स को ‘सुपरफूड’ के रूप में प्रमोट कर उन्होंने हेल्दी ईटिंग कल्चर को बढ़ावा दिया।
सफलता का मंत्र
आज निष्ठा चौहान का बिजनेस मॉडल इतना सफल है कि उनके कैफे का सालाना टर्नओवर 1 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वे अब अपने ब्रांड का विस्तार अन्य शहरों में करने की योजना बना रही हैं। उनकी कहानी साबित करती है कि:
- सफलता के लिए करोड़ों के निवेश की नहीं, बल्कि एक मजबूत विजन की जरूरत होती है।
- डिग्री केवल नौकरी पाने का जरिया नहीं, बल्कि समस्या का समाधान (Problem Solving) ढूंढने का टूल है।
निष्ठा चौहान की सफलता की यह कहानी हमें सिखाती है कि ‘वोकल फॉर लोकल’ का मंत्र अपनाकर और अपनी प्रतिभा को सही दिशा में लगाकर छोटे से निवेश से भी बड़ा साम्राज्य खड़ा किया जा सकता है।


