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    नेपाल बाढ़ : 469 की मौत, 30 से अधिक देशों के नागरिक शामिल, 1500 से अधिक अब भी लापता

    नेपाल-चीन सीमावर्ती हिमालयी क्षेत्रों और भोटे कोशी व त्रिशूली नदी घाटी में आई भीषण बाढ़ और जलप्रलय ने भारी तबाही मचाई है। इस भयानक प्राकृतिक आपदा में हताहतों और लापता लोगों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। नेपाली सेना, पुलिस और भारतीय दूतावास राहत और बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। हेलीकॉप्टरों के जरिए दूरदराज के इलाकों में फंसे लोगों को एयरलिफ्ट किया जा रहा है और भोजन व दवाइयां पहुंचाई जा रही हैं। भारत सरकार ने प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिजनों की सहायता के लिए 24 घंटे काम करने वाला कंट्रोल रूम और इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।

    तबाही और हताहतों का आंकड़ा

    • मृतकों की संख्या: आपदा में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 390 से अधिक (करीब 469 तक की आशंका व पुष्टि) हो गया है।
    • लापता लोग: 1400 से 1500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। इनमें नेपाल, भारत सहित करीब 30 से अधिक देशों के नागरिक शामिल हैं।
    • लापता भारतीय: 280 से अधिक भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिनमें अधिकांश कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री और पनबिजली परियोजनाओं के कर्मचारी हैं।

    भारतीय राज्यों का रुख और फोन पर सांत्वना

    • महाराष्ट्र सरकार की पहल: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने नेपाल में फंसे राज्य के पर्यटकों और पीड़ितों से वीडियो कॉल के माध्यम से बात की। उन्होंने पीड़ितों को हिम्मत बनाए रखने की सलाह दी और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
    • अन्य राज्यों का अलर्ट: उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल सरकारें अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए लगातार केंद्र और काठमांडू स्थित दूतावास से समन्वय बना रही हैं।

    यूपी और बिहार में अलर्ट

    नेपाल की नदियों में उफान के कारण भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।

    • गंडक और नारायणी नदी: त्रिशूली नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जाने के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश (विशेषकर महाराजगंज और कुशीनगर) के जिला प्रशासनों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

    बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान

    • सड़कें और पुल ध्वस्त: बाढ़ के तेज बहाव में लगभग 80 से अधिक पुल (35 मोटर योग्य और 45 सस्पेंशन ब्रिज) और 40 किलोमीटर से अधिक सड़कें पूरी तरह बह गईं या क्षतिग्रस्त हो गईं।
    • बिजली परियोजनाएं: त्रिशूली-1 और रसुवागढ़ी समेत कई प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है और कई कर्मचारी मलबे में फंस गए या लापता हैं।
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