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    फिल्म ‘हैप्पी पटेल’ का मूवी रिव्यू : अनाड़ी जासूस का अनोखा मिशन

    रिलीज डेट: 16 जनवरी 2026

    कलाकार: वीर दास, मिथिला पालकर, मोना सिंह, शारिब हाशमी, इमरान खान और आमिर खान

    निर्देशक: वीर दास और कवि शास्त्री

    शैली: स्पाई-कॉमेडी

    रेटिंग: ½ (2.5/5)


    कहानी: अनाड़ी जासूस का अनोखा मिशन

    ‘हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस’ की कहानी हैप्पी पटेल (वीर दास) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो दो ब्रिटिश जासूसों का गोद लिया हुआ बेटा है। हैप्पी खुद एक ‘अनाड़ी’ जासूस है जो सात बार फेल हो चुका है, लेकिन किस्मत उसे भारत (गोवा) के एक हाई-स्टेक मिशन पर ले आती है। यहाँ उसका सामना खतरनाक लेडी गैंगस्टर ‘मामा’ (मोना सिंह) से होता है। इसी बीच उसे रूपा (मिथिला पालकर) से प्यार हो जाता है। फिल्म का अंत हैप्पी के अपनी जड़ों को खोजने और भारत में ही बसने के फैसले के साथ होता है।

    अभिनय और निर्देशन

    • वीर दास: फिल्म की जान हैं। उन्होंने एक कन्फ्यूज्ड और अनाड़ी जासूस के किरदार को अपने सिग्नेचर कॉमिक अंदाज में बखूबी निभाया है। निर्देशन में भी उन्होंने नयापन लाने की कोशिश की है।
    • इमरान खान का कमबैक: करीब 10 साल बाद पर्दे पर लौटे इमरान खान (मिलिंद मोरिया के रोल में) ने अपनी छोटी सी भूमिका में सबका ध्यान खींचा है। उनका ‘दिल्ली बेली’ वाला अंदाज दर्शकों को पसंद आ रहा है।
    • मोना सिंह और अन्य: मोना सिंह ने विलेन ‘मामा’ के रूप में दमदार मौजूदगी दर्ज कराई है, हालांकि उनका किरदार कुछ जगहों पर अटपटा लगता है। शारिब हाशमी और सृष्टि तावड़े ने सहायक भूमिकाओं में अच्छा साथ दिया है।
    • आमिर खान का कैमियो: फिल्म के अंत में आमिर खान का कैमियो कहानी में एक खास गहराई और रोमांच जोड़ता है।

    खूबियां और खामियां

    पॉजिटिव: फिल्म का दूसरा हिस्सा (Second Half) काफी मजेदार है, जहाँ ट्विस्ट और टर्न्स के साथ हंसी का डोज बढ़ जाता है। आमिर खान और इमरान खान की मौजूदगी फिल्म के आकर्षण को बढ़ाती है।

    नेगेटिव: फिल्म की शुरुआत काफी धीमी (Slow Burn) है। स्पाई-कॉमेडी के नाम पर कई जगह ‘बिना सिर-पैर के’ जोक्स और पुराने फॉर्मूले का इस्तेमाल किया गया है, जो हर किसी को पसंद नहीं आएगा। पटकथा में निरंतरता की कमी कुछ दर्शकों को निराश कर सकती है।

    फैसला

    अगर आप वीर दास के डार्क ह्यूमर और इमरान खान के प्रशंसक हैं, तो इस लाइट-हार्टेड कॉमेडी को एक बार देख सकते हैं। हालांकि, फिल्म से बहुत अधिक ‘लॉजिक’ या गंभीर जासूसी की उम्मीद न रखें।

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