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    मोदी@76: संघ से जुड़ने से लेकर CM-PM बनने का सफर, 25 वर्ष पूरे होने पर देशभर में जश्न, बधाइयाँ

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ। 2026 में वह अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। आज देश की राजनीति में उनका नाम प्रधानमंत्री के तौर पर जाना जाता है, लेकिन सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने से पहले उनका सफर कई दशकों के संगठनात्मक और राजनीतिक काम से होकर गुजरा। वडनगर के शुरुआती दिनों, आध्यात्मिक यात्राओं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ाव ने उनके आगे के राजनीतिक जीवन की दिशा तय की।

    वडनगर में बचपन और परिवार की दुकान

    नरेंद्र मोदी का बचपन वडनगर में बीता। उनके आधिकारिक जीवन परिचय के अनुसार, परिवार आर्थिक रूप से सामान्य स्थिति में था और वह पढ़ाई के साथ परिवार की चाय की दुकान पर भी मदद करते थे। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान मेहसाणा रेलवे स्टेशन पर सैनिकों को चाय पिलाने का उल्लेख उनके आधिकारिक जीवन परिचय में मिलता है।

    करीब 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया और देश के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा की। इस दौरान वह रामकृष्ण मिशन और स्वामी विवेकानंद से जुड़े विचारों से भी प्रभावित हुए। बाद में वह गुजरात लौटे और अहमदाबाद पहुंचे। यहीं से उनके संगठनात्मक जीवन का अगला अध्याय शुरू हुआ।

    संघ से कैसे जुड़े?

    अहमदाबाद में नरेंद्र मोदी आरएसएस के संपर्क में आए। 1972 में वह संघ के प्रचारक बने। प्रचारक के रूप में उन्होंने संगठन के विस्तार और कार्यकर्ताओं के साथ काम करने की जिम्मेदारियां संभालीं। उनका शुरुआती राजनीतिक प्रशिक्षण मुख्य रूप से इसी संगठनात्मक काम के जरिए हुआ।

    1970 के दशक में वह गुजरात के नवनिर्माण आंदोलन से जुड़े। 1975 में आपातकाल लागू होने के बाद वह आपातकाल विरोधी गतिविधियों में भी सक्रिय रहे। इसके बाद संघ में उनकी जिम्मेदारियां बढ़ती गईं। 1978 में उन्हें विभाग प्रचारक और बाद में संभाग प्रचारक की जिम्मेदारी मिली।

    भाजपा में प्रवेश और संगठन की राजनीति

    1980 के दशक में नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर भाजपा के साथ आगे बढ़ा। 1987 में वह भाजपा की गुजरात इकाई से जुड़े और संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली। अहमदाबाद नगर निगम चुनाव में भाजपा की सफलता के अभियान में उनकी संगठनात्मक भूमिका रही। इसके बाद 1990 के गुजरात विधानसभा चुनाव और 1995 के विधानसभा चुनाव में भी वह पार्टी के संगठनात्मक काम में सक्रिय रहे। 1995 के चुनाव में भाजपा ने गुजरात में 121 सीटें जीतीं।

    1990 के दशक में मोदी की जिम्मेदारियां गुजरात से बाहर भी बढ़ीं। 1995 में वह भाजपा के राष्ट्रीय सचिव बने और 1998 में राष्ट्रीय महासचिव संगठन की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान उनका काम कई राज्यों और राष्ट्रीय स्तर के संगठन से जुड़ा रहा।

    2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने

    नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन में सबसे बड़ा मोड़ 7 अक्तूबर 2001 को आया, जब उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इससे पहले उन्होंने लगभग तीन दशक तक संगठन के भीतर अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाई थीं। मुख्यमंत्री बनने के समय गुजरात जनवरी 2001 के भुज भूकंप के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण की चुनौती से गुजर रहा था।

    इसके बाद मोदी गुजरात की राजनीति के प्रमुख चेहरे बने और 2014 तक मुख्यमंत्री रहे। इसी दौरान उनका राजनीतिक आधार गुजरात से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद 26 मई 2014 को उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। बाद में 2019 और 2024 में भी उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में लगातार दूसरे और तीसरे कार्यकाल की शपथ ली।

    जन्मदिन पर वडनगर से वाराणसी तक कार्यक्रम

    76वें जन्मदिन के मौके पर वडनगर से वाराणसी तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कई अन्य नेताओं ने प्रधानमंत्री को शुभकामनाएं दी हैं। भाजपा ने 17 सितंबर से सेवा संकल्प अभियान शुरू किया है। गुजरात में दीप प्रज्ज्वलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य आयोजन रखे गए हैं। वडनगर से वाराणसी तक बाइक यात्रा भी अभियान का हिस्सा है, जिसे अमित शाह हरी झंडी दिखाने वाले हैं। इस तरह मोदी के जन्मदिन के साथ उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने का पड़ाव भी जोड़ा जा रहा है

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