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    मोदी सरकार लोकतंत्र विरोधी नहीं, नेहरू की गलतियों को स्वीकारना जरुरी, शशि थरूर की दोटूक

    कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 9 जनवरी 2026 को केरल विधानसभा अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव (KLIBF) में भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और वर्तमान मोदी सरकार को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उनके इस बयान को नेहरूवादी विरासत और वर्तमान राजनीति के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

    शशि थरूर के संबोधन के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

    1. नेहरू की गलतियों पर बेबाक राय

    थरूर ने स्पष्ट किया कि यद्यपि वे नेहरू के दृष्टिकोण के बहुत बड़े प्रशंसक हैं, लेकिन वे उनके “अंधभक्त” नहीं हैं।

    • 1962 का युद्ध: थरूर ने स्वीकार किया कि 1962 में चीन के खिलाफ भारत की हार के लिए नेहरू के कुछ फैसलों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इतिहास की ऐसी गलतियों को स्वीकार करना और उन पर चर्चा करना आवश्यक है।
    • बलि का बकरा: उन्होंने आलोचना की कि भाजपा सरकार नेहरू को एक “सुविधाजनक बलि का बकरा” बना देती है और आज की हर समस्या के लिए उन्हें ही दोषी ठहराती है, जो कि गलत है।

    2. मोदी सरकार पर टिप्पणी

    थरूर ने वर्तमान केंद्र सरकार के प्रति अपना रुख स्पष्ट करते हुए एक महत्वपूर्ण अंतर बताया:

    • “लोकतंत्र विरोधी नहीं”: थरूर ने कहा कि वे मोदी सरकार को लोकतंत्र विरोधी (Anti-democratic) नहीं कहेंगे।
    • “नेहरू विरोधी”: उनके अनुसार, यह सरकार निश्चित रूप से नेहरू विरोधी (Anti-Nehru) है और उनकी विरासत को मिटाने या कमतर दिखाने का प्रयास करती है।

    3. लोकतंत्र के संस्थापक के रूप में नेहरू

    थरूर ने नेहरू के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वे भारतीय लोकतंत्र के सच्चे संस्थापक थे।

    • उन्होंने तर्क दिया कि नेहरू ने ही देश में ऐसी लोकतांत्रिक संस्थाओं की नींव रखी, जिनकी बदौलत आज एक ‘चाय बेचने वाला’ भी देश का प्रधानमंत्री बन सका है।
    • उन्होंने कहा कि अगर भारत आज एक मजबूत लोकतंत्र है, तो इसका श्रेय नेहरू की दूरदर्शिता को जाता है जिन्होंने आजादी के बाद सत्ता के केंद्रीकरण के बजाय लोकतांत्रिक मूल्यों को चुना।

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