प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में इसी महीने एक बड़े मंत्रिमंडल फेरबदल और विस्तार की मजबूत संभावना जताई जा रही है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के तहत सांगठनिक बदलावों की घोषणा के बाद, अब सरकार के स्तर पर भी मंत्रालयों की जिम्मेदारियों को नए सिरे से पुनर्गठित करने की तैयारी चल रही है।
फेरबदल के प्रमुख बिंदु और संभावित बदलाव
- दो दर्जन से अधिक मंत्रियों के विभागों में बदलाव: राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के मुताबिक करीब 20 से ज्यादा मंत्रियों के पोर्टफोलियो बदले जा सकते हैं। कुछ मंत्रियों का कामकाज कम किया जा सकता है, जबकि प्रदर्शन और सरकार की नई प्राथमिकताओं के आधार पर कई चेहरों को अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है।
- संगठन और सरकार के बीच तालमेल: सरकार में मौजूद कुछ मंत्रियों को वापस संगठन में भेजा जा सकता है।
- पीयूष गोयल: वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाए जाने के बावजूद उनके मंत्रिमंडल में बने रहने के संकेत हैं। अमेरिका के साथ व्यापार वार्ताओं में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए उनकी जिम्मेदारी बरकरार रखी जा सकती है।
- धर्मेंद्र प्रधान: हाल ही में शिक्षा मंत्री पद से उनके इस्तीफे के बाद, धर्मेंद्र प्रधान को किसी अन्य मंत्रालय में नई भूमिका दिए जाने की संभावना है।
- महिला और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व: मंत्रिमंडल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए राजस्थान से डॉ. अलका गुर्जर जैसे नामों पर विचार हो रहा है। दक्षिण भारत में पार्टी के सांगठनिक संतुलन की भरपाई के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल में वहां से नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं।
सहयोगी दलों की मांग और क्षेत्रीय समीकरण
- एनडीए के घटक दल:
- लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान अपने मौजूदा मंत्रालय से बड़ा पोर्टफोलियो चाहते हैं।
- महाराष्ट्र से शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) ने 13 सांसदों की क्षमता के आधार पर एक अतिरिक्त कैबिनेट पद की मांग की है।
- तमिलनाडु और डीएमके का कोण: दक्षिण भारत के राजनीतिक समीकरणों को साधने के तहत द्रमुक (DMK) को भी केंद्र सरकार में शामिल किए जाने की अटकलें तेज हैं।
- उत्तर प्रदेश और चुनावी राज्य: आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य या ब्रजेश पाठक में से किसी एक को दिल्ली लाकर केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश से अनुराग ठाकुर को लेकर भी अहम फैसला संभव है।
यह फेरबदल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ आगामी राज्य चुनावों और 2029 के आम चुनाव के राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।


