दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। पीएम मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण के संदर्भ में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का जिक्र करते हुए कहा कि उनके इस बयान ने एक “होम्योपैथिक गोली” की तरह काम किया, जिससे ऐसे विचार रखने वाले लोग खुद-ब-खुद बेनकाब होकर सामने आ गए हैं।
प्रधानमंत्री के इस बयान पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। सीजेपी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि युवाओं और सवाल पूछने वाले नागरिकों को ऐसे भ्रामक या आपत्तिजनक लेबल देने के बजाय सरकार को उन्हें बेहतर भविष्य और उम्मीद देनी चाहिए।
SRCC मंच से पीएम मोदी का बयान
एसआरसीसी में छात्रों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने देश की आर्थिक प्रगति, सुरक्षा और विकास का रिपोर्ट कार्ड रखा। इसके साथ ही उन्होंने आलोचकों और विपक्षी विचारधारा पर तीखा प्रहार किया:
- होम्योपैथी की गोली का रूपक: पीएम मोदी ने कहा, “मैंने 15 अगस्त को लाल किले से ‘दिमागी नक्सल’ नाम की होम्योपैथिक गोली दी थी। जैसे होम्योपैथी दवा लेने के बाद बीमारी के लक्षण पहले उभरकर बाहर आते हैं, वैसे ही इस टिप्पणी के बाद सभी दिमागी नक्सल एक-एक करके सामने आ गए हैं।”
- ‘नाराज फूफा’ और नकारात्मकता पर तंज: उन्होंने देश की प्रगति में रोड़ा अटकाने और हर नीति का विरोध करने वाली मानसिकता की तुलना ‘नाराज फूफा’ से की।
- सुरक्षा और अर्थव्यवस्था: पीएम मोदी ने 2013 के दौर (पॉलिसी पैरालिसिस) से तुलना करते हुए कहा कि आज भारत की नीति स्पष्ट है, सीमाएं सुरक्षित हैं और अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है।
CJP का पलटवार: ‘सवाल पूछने पर नक्सली कहना गलत’
पीएम मोदी के इस बयान पर सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
- युवाओं को उम्मीद की जरूरत: सीजेपी का कहना है कि जब देश का शिक्षित युवा रोजगार, अवसरों और नीतियों पर सरकार से सवाल पूछता है, तो उसे ‘दिमागी नक्सल’ या किसी अन्य श्रेणी में बाँटना लोकतंत्र के खिलाफ है।
- ‘हर जिले में जंतर-मंतर’: सौरव दास ने दावा किया कि आज देश के युवाओं और जेन-जी (Gen-Z) में जागरूकता बढ़ रही है। लोग डर से मुक्त हो रहे हैं और समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं। देश के हर जिले में लोग अपने अधिकारों के लिए एकजुट हो रहे हैं।
- बांटने बनाम जोड़ने की राजनीति: सीजेपी ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष युवाओं को बांटने का प्रयास कर रहा है, जबकि विपक्ष और आम नागरिक उन्हें जोड़ने का काम करेंगे।
यह विवाद इस बात को रेखांकित करता है कि स्वतंत्रता दिवस के भाषण से शुरू हुई ‘दिमागी नक्सल’ वाली बहस अब उच्च शिक्षण संस्थानों और राजनीतिक गलियारों में एक बड़े वैचारिक टकराव का रूप ले चुकी है।


