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    ‘घूसखोर पंडत’ टाइटल पर भड़का FWICE, मनोज बाजपेयी की फिल्म पर संकट के बादल

    बॉलीवुड की चर्चित फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ रिलीज से पहले ही विवादों के भंवर में फंस गई है। फिल्म के टाइटल को लेकर फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने कड़ी आपत्ति जताई है। फेडरेशन का मानना है कि इस तरह के “भड़काऊ और अपमानजनक” शीर्षक समाज में विद्वेष फैला सकते हैं और किसी विशेष समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचा सकते हैं।

    यह विवाद ऐसे समय में आया है जब मनोज बाजपेयी जैसे मंझे हुए कलाकार फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं, जिससे फिल्म को लेकर चर्चा पहले से ही काफी गर्म थी।

    FWICE की आपत्ति और चिंताएं

    FWICE ने सेंसर बोर्ड (CBFC) और फिल्म निर्माताओं को पत्र लिखकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। फेडरेशन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

    • अपमानजनक भाषा: संस्था का कहना है कि ‘पंडत’ शब्द के साथ ‘घूसखोर’ (रिश्वतखोर) जोड़ना एक पूरी जाति या समुदाय को बदनाम करने जैसा है। यह न केवल गरिमा के खिलाफ है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी नुकसान पहुँचाता है।
    • भड़काऊ टाइटल्स का बढ़ता चलन: FWICE ने चिंता जताई है कि हाल के दिनों में फिल्म निर्माता केवल ‘सस्ते प्रचार’ (Cheap Publicity) के लिए जानबूझकर विवादित और भड़काऊ शीर्षक रख रहे हैं।
    • कार्रवाई की मांग: फेडरेशन ने मांग की है कि फिल्म का नाम तुरंत बदला जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर निर्माताओं ने इस पर संज्ञान नहीं लिया, तो वे फिल्म के खिलाफ कड़ा विरोध प्रदर्शन करेंगे।

    क्या है फिल्म की कहानी?

    हालांकि फिल्म की पूरी स्क्रिप्ट का खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह एक सटायर (व्यंग्य) फिल्म है। फिल्म में मनोज बाजपेयी एक ऐसे भ्रष्ट सरकारी कर्मचारी का किरदार निभा रहे हैं जो अपनी धार्मिक छवि के पीछे अपनी अनैतिक गतिविधियों को छुपाता है। फिल्म का उद्देश्य व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार पर कटाक्ष करना है, लेकिन इसका शीर्षक ही अब सबसे बड़ी बाधा बन गया है।


    फिल्म जगत की प्रतिक्रिया

    फिल्म उद्योग के एक धड़े का मानना है कि कलाकारों को रचनात्मक स्वतंत्रता (Creative Freedom) मिलनी चाहिए और शीर्षक को पूरी फिल्म के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। वहीं, दूसरा पक्ष FWICE के समर्थन में है और उनका कहना है कि किसी की धार्मिक या जातीय पहचान को नकारात्मक विशेषणों के साथ जोड़ना गलत है।

    आमतौर पर ऐसे विवादों के बाद निर्माताओं को फिल्म का नाम बदलना पड़ता है (जैसे ‘पद्मावत’ या ‘लक्ष्मी’ के मामले में हुआ था)। अब सबकी नजरें मनोज बाजपेयी और फिल्म के निर्देशक के आधिकारिक बयान पर टिकी हैं।

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