वेनेजुएला में मचे भारी राजनीतिक घमासान के बीच एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। अमेरिकी सेना के एक विशेष ऑपरेशन के बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लेकर न्यूयॉर्क ले जाया गया है। इस नाटकीय घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हड़कंप मचा दिया है।
मादुरो की गिरफ्तारी और ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’
- सैन्य कार्रवाई: अमेरिकी सेना की विशिष्ट ईकाई (Delta Force) ने ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ के तहत काराकस में मादुरो के सुरक्षित ठिकाने पर छापा मारा। इस ऑपरेशन में 150 से अधिक विमानों का उपयोग किया गया।
- न्यूयॉर्क में हिरासत: मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर अमेरिकी युद्धपोत के जरिए न्यूयॉर्क लाया गया है। उन पर ‘नारको-टेररिज्म’ (नशीली दवाओं के आतंकवाद) के आरोप में मुकदमा चलाया जाएगा।
- ट्रंप का बयान: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि जब तक वेनेजुएला में शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण नहीं हो जाता, तब तक “अमेरिका ही वेनेजुएला को चलाएगा।” उन्होंने देश के विशाल तेल संसाधनों पर नियंत्रण की बात भी कही है।
डेल्सी रोड्रिग्ज बनीं अंतरिम राष्ट्रपति
- सुप्रीम कोर्ट का आदेश: वेनेजुएला की शीर्ष अदालत ने देश में संवैधानिक निरंतरता बनाए रखने के लिए उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को तुरंत अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालने का आदेश दिया है।
- संवैधानिक प्रावधान: वेनेजुएला के संविधान के अनुच्छेद 233 के तहत, राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति सत्ता की कमान संभालता है। कोर्ट ने उन्हें राष्ट्रपति के सभी अधिकारों और शक्तियों का उपयोग करने की अनुमति दी है।
- रोड्रिग्ज का रुख: हालांकि रोड्रिग्ज ने मादुरो को ही देश का वैध राष्ट्रपति बताया है और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है, लेकिन प्रशासनिक कार्यों को जारी रखने के लिए वह अंतरिम प्रमुख की भूमिका में आ गई हैं।
प्रमुख घटनाक्रम एक नजर में
| घटना | विवरण |
| ऑपरेशन का नाम | ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व (Operation Absolute Resolve) |
| गिरफ्तारी स्थल | काराकस, वेनेजुएला |
| वर्तमान स्थिति | मादुरो न्यूयॉर्क में FBI/DEA की हिरासत में |
| नया नेतृत्व | डेल्सी रोड्रिग्ज (अंतरिम राष्ट्रपति) |
| मौत का आंकड़ा | रिपोर्टों के अनुसार, सैन्य कार्रवाई में कम से कम 40 लोग मारे गए |
यह घटना अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के लिहाज से कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। रूस और चीन जैसे देशों ने इस कार्रवाई को “साम्राज्यवादी हमला” बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।


