More
    HomeHindi NewsBusinessलग्जरी कार, वाइन, बीयर होगी सस्ती, EU से FTA का इतने दिन...

    लग्जरी कार, वाइन, बीयर होगी सस्ती, EU से FTA का इतने दिन में होगा असर

    भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने 18 साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार 27 जनवरी 2026 को ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत पूरी कर ली है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ (सभी सौदों की जननी) करार दिया है।

    ​यह समझौता दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक बाजारों को एक साथ लाता है, जिससे आने वाले समय में लग्जरी कारों से लेकर विदेशी शराब तक कई चीजें सस्ती होने वाली हैं।

    ​क्या है यह समझौता और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

    ​मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दो पक्षों के बीच एक ऐसी संधि है जिसमें वे एक-दूसरे से आयात-निर्यात किए जाने वाले सामानों पर इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) को या तो खत्म कर देते हैं या बहुत कम कर देते हैं।

    • बाजार का आकार: यह डील करीब 200 करोड़ लोगों के एक विशाल मुक्त व्यापार क्षेत्र का निर्माण करेगी।
    • अर्थव्यवस्था: भारत और EU मिलकर वैश्विक जीडीपी का लगभग 25% हिस्सा हैं।
    • रोजगार: इस समझौते से भारत में कपड़ा, चमड़ा और रत्न-आभूषण जैसे क्षेत्रों में लाखों नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।

    ​क्या-क्या होगा सस्ता?

    ​समझौते के लागू होने के बाद भारतीय उपभोक्ताओं को यूरोपीय उत्पादों पर भारी बचत मिलेगी:

    लग्जरी कारें (BMW, Audi, Mercedes)70% से 110% तक ड्यूटीशुरू में 40% और धीरे-धीरे 10% तक
    यूरोपीय वाइन और बीयर150% तक भारी टैक्समहंगी बोतलों पर टैक्स घटकर 40% से 20% तक
    मशीनरी और उपकरण44% तक ड्यूटीलगभग 0% (शून्य)
    फार्मा और केमिकल्स11% से 22% तक ड्यूटी

    ​भले ही बातचीत पूरी हो गई है, लेकिन कीमतें कल सुबह से कम नहीं होंगी। इसके पीछे कुछ तकनीकी और कानूनी प्रक्रियाएं हैं:

    1. लीगल स्क्रबिंग (Legal Scrubbing): समझौते के ड्राफ्ट की कानूनी जांच में अभी 5-6 महीने लगेंगे।
    2. अनुमोदन (Ratification): भारत में इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी चाहिए, जबकि यूरोप में इसे ‘यूरोपीय संसद’ से पास होना होगा।
    3. लागू होने की तारीख: विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता 2027 की शुरुआत में पूरी तरह प्रभावी हो पाएगा।

    ​भारत को क्या फायदा होगा?

    • निर्यात में उछाल: भारतीय कपड़ा (Textiles), जूते-चप्पल और कृषि उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में ‘ड्यूटी-फ्री’ एंट्री मिलेगी।
    • तकनीकी निवेश: यूरोपीय संघ भारत के कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रोजेक्ट्स में 500 मिलियन यूरो का निवेश करेगा।
    • पेशेवरों की आवाजाही: आईटी और अन्य क्षेत्रों के भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए यूरोप में काम करना आसान होगा।

    RELATED ARTICLES

    Most Popular

    Recent Comments