भारत के मध्यम और निम्न आय वर्गीय परिवारों के लिए रसोई का बजट संभालना एक बड़ी चुनौती बन गया है। क्रिसिल (CRISIL) की ताजा ‘रोटी चावल रेट’ रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2026 में आम आदमी की थाली पर दोहरी मार पड़ी है—एक तरफ टमाटर की आसमान छूती कीमतें और दूसरी तरफ एलपीजी (LPG) गैस संकट।
टमाटर ने बिगाड़ा स्वाद और बजट
रिपोर्ट के मुताबिक, शाकाहारी और मांसाहारी दोनों ही थालियों की कीमत में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण टमाटर है।
- कीमतों में उछाल: पिछले एक महीने में टमाटर की कीमतों में 30% से 40% तक की वृद्धि दर्ज की गई है। बेमौसम बारिश और ‘पश्चिमी विक्षोभ’ के कारण फसल को हुए नुकसान ने आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को बाधित किया है।
- थाली की लागत: एक मानक शाकाहारी थाली की कीमत पिछले साल के मुकाबले लगभग 7-9% बढ़ गई है।
प्याज और आलू से मामूली राहत
जहाँ टमाटर रुला रहा है, वहीं रसोइया की अन्य मुख्य वस्तुओं ने थोड़ी राहत दी है:
- आलू और प्याज: इनकी आवक मंडियों में स्थिर बनी हुई है, जिससे इनकी कीमतों में पिछले महीने के मुकाबले कोई बड़ा उछाल नहीं देखा गया है। इससे थाली का बजट पूरी तरह चरमराने से बच गया है।
- दालें: दालों की कीमतों में भी स्थिरता देखी गई है, जो शाकाहारी भोजन का मुख्य हिस्सा हैं।
एलपीजी (LPG) और गैस संकट का गहरा असर
रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला दावा ईंधन की कीमतों को लेकर किया गया है।
- गैस संकट: पश्चिम एशिया (विशेषकर ईरान-अमेरिका संघर्ष) में जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर एलपीजी और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर बुरा असर पड़ा है।
- लागत में वृद्धि: भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की रिफिलिंग महंगी हो गई है। अप्रैल 2026 में रसोई गैस की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने थाली को पकाने की लागत (Cooking Cost) को 12% तक बढ़ा दिया है।
- ईंधन बनाम खाद्य: रिपोर्ट कहती है कि भले ही कुछ सब्जियां सस्ती हों, लेकिन उन्हें पकाने में इस्तेमाल होने वाली गैस महंगी होने के कारण अंततः उपभोक्ता की जेब पर बोझ बढ़ ही रहा है।
रिपोर्ट का निष्कर्ष
क्रिसिल की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि ‘थाली की महंगाई’ अब केवल खाद्य वस्तुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल फ्यूल संकट से भी जुड़ गई है।
- शाकाहारी थाली: साल-दर-साल आधार पर महंगी हुई।
- मांसाहारी थाली: चिकन की कीमतों में गिरावट के बावजूद, पकाने की लागत और टमाटर के कारण इसकी कीमत में भी मामूली वृद्धि देखी गई है।
आने वाले हफ्तों में यदि पश्चिमी विक्षोभ के कारण फसलें और प्रभावित होती हैं, तो सब्जियों की कीमतों में और तेजी आ सकती है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों पर आम आदमी की थाली का भविष्य निर्भर करेगा।


