देश में एलपीजी (LPG) सिलेंडर की किल्लत और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। शुक्रवार, 13 मार्च 2026 को भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने इस मुद्दे पर एक-दूसरे पर तीखे हमले किए।
बीजेपी का रुख: ‘विपक्ष फैला रहा है पैनिक’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एलपीजी की किल्लत की खबरों को विपक्ष का ‘एजेंडा’ करार दिया है। पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से जारी बयान में कहा गया है कि कुछ तत्व जानबूझकर देश में अफरा-तफरी (पैनिक) का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
मोदी ने कहा, “मैं इस समय राजनीतिक टिप्पणी नहीं करना चाहता, लेकिन ऐसा करने वाले लोग जनता के सामने खुद बेनकाब हो रहे हैं। वे देश का बड़ा नुकसान कर रहे हैं।” आपूर्ति श्रृंखला में आई अस्थायी बाधाओं को ‘किल्लत’ के रूप में पेश करना राजनीति से प्रेरित है।
कांग्रेस का हमला: ‘ऊर्जा सुरक्षा से समझौता’
वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस ने एलपीजी की कमी को लेकर केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति को विफल करार देते हुए इसे ‘ऊर्जा सुरक्षा से समझौता’ बताया है।
पार्टी ने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “देश में एलपीजी की भारी किल्लत है। आम नागरिक परेशान हैं और मिट्टी के चूल्हे पर खाना पकाने को मजबूर हैं।” शुक्रवार को दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार की गलत नीतियों के कारण आम आदमी को कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है और वे इसका खामियाजा जनता को नहीं भुगतने देंगे।
क्या है जमीनी हकीकत?
मध्य-पूर्व में ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे सैन्य टकराव के कारण वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बुरी तरह प्रभावित हुई है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतें और शिपिंग में हो रही देरी का सीधा असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ रहा है।
दोनों पार्टियों के इस टकराव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऊर्जा संकट अब देश में एक बड़े राजनीतिक मुद्दे में तब्दील हो चुका है, जहाँ जनता महंगाई और आपूर्ति के बीच पिस रही है।


