भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार पर एक गंभीर आरोप लगाते हुए नया राजनीतिक विवाद छेड़ दिया है। भाजपा का दावा है कि कर्नाटक सरकार ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में करोड़ों रुपये की बेशकीमती सरकारी जमीनें गांधी परिवार के नेतृत्व वाले ‘कांग्रेस भवन ट्रस्ट’ को कौड़ियों के दाम (बाजार मूल्य के मात्र 5% पर) आवंटित की हैं।
भाजपा के प्रमुख आरोप
भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने आज (18 फरवरी 2026) एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन आरोपों को सार्वजनिक किया। उनके दावों के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- 31 भूखंडों का आवंटन: आरोप है कि राज्य के 10-12 जिलों (जैसे बादामी, कोप्पल, तुमकुरु, उडुपी और मंगलुरु) में लगभग 31 नागरिक सुविधा (CA) भूखंड अवैध रूप से कांग्रेस पार्टी को कार्यालय बनाने के लिए दिए गए हैं।
- बाजार मूल्य बनाम आवंटित मूल्य: भाजपा ने कुछ उदाहरण देते हुए बताया कि कोप्पल में ₹1.31 करोड़ की जमीन मात्र ₹6.56 लाख में और बादामी में ₹24.52 लाख का प्लॉट केवल ₹1.22 लाख में दिया गया।
- नियमों का उल्लंघन: गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि सरकारी अधिकारियों ने लिखित में चेतावनी दी थी कि ‘नागरिक सुविधा’ (Civic Amenity) वाली जमीनें किसी राजनीतिक दल को नहीं दी जा सकतीं, फिर भी कैबिनेट ने विशेष मंजूरी देकर इन्हें आवंटित किया।
कांग्रेस का पलटवार
इन आरोपों पर कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है:
- शताब्दी स्मारक: उन्होंने कहा कि ये जमीनें बेलगावी में महात्मा गांधी की कांग्रेस अध्यक्षता के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में ‘कांग्रेस भवन’ बनाने के लिए ली गई हैं।
- भाजपा पर ‘दोहरे मानक’ का आरोप: शिवकुमार ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा शासन के दौरान चाणक्य विश्वविद्यालय और आरएसएस से जुड़े संस्थानों को भी रियायती दरों पर जमीनें दी गई थीं, तब वे नियम कहाँ थे?
राजनीतिक समीकरण
यह नया विवाद ऐसे समय में आया है जब राज्य में पहले से ही MUDA (मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण) और वाल्मीकि निगम घोटाले को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। भाजपा ने इन सभी आवंटनों को तत्काल रद्द करने और मामले की कानूनी जांच कराने की मांग की है, अन्यथा बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।


